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आसानी से कर सकेंगे सस्ती दवाओं की पहचान
अखिलेश महाजन/अमर उजाला, सोलन
Updated Mon, 01 Dec 2014 01:16 PM IST
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बाजार में मौजूद 348 तरह की जेनेरिक और सस्ती दवाओं की पहचान करना अब और भी आसान होगा। केमिस्ट ब्रांडेड दवाओं के नाम पर उपभोक्ता को चूना नहीं लगा सकेंगे। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए - नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइजिंग अथॉरिटी) सस्ती दवाओं की पहचान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर लेबलिंग में बड़ा बदलाव करने जा रहा है।
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एनपीपीए ने उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ मिलकर इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। अब दवा उद्योगों, व्यापार संघों, उपभोक्ता संगठनों, राज्य औषधि नियंत्रकों से 20 दिन के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
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दवा (ड्रग्स) विभाग के मुताबिक जरूरी सूची में शामिल तय कीमतों वाली दवाओं पर बाजार में निगरानी रखना असंभव है। 6000 से अधिक विभिन्न ब्रांड के पैक, 600 से अधिक फॉर्मूलेशन (कंटेंट) और छह लाख से अधिक खुदरा दुकानें हैं। ऐसे में ड्रग विभाग को निगरानी रखने में मुश्किल आ रही है।
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लिहाजा लेबलिंग में यह बदलाव लाया जा रहा है। दवा नियंत्रक नवनीत मरवाहा ने इसकी पुष्टि की कि एनपीपीए की कवायद से सस्ती दवाओं की पहचान केवल विभाग ही नहीं आम लोग भी आसानी से कर सकेंगे।
ऐसे होगा बदलाव
नेशनल लिस्ट ऑफ असेंशियल मेडिसिन में शामिल दवाओं की पैकिंग में निर्माता कंपनियों को पैकिंग और लेबिलंग के वक्त लाल रंग के बॉक्स में दवा मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) शेड्यूल लिखना होगा। यही नहीं प्राधिकरण की तय प्रति यूनिट की कीमत भी प्रदर्शित करनी होगी।
अन्यथा यह दवाएं बाजार में नही बिक सकेंगी। देश में 348 से अधिक दवाओं को इस सूची में शामिल किया गया है। यह दवाएं सामान्य से लेकर जीवनरक्षक हैं।