अस्पताल में बंदर का उत्पात, डॉक्टर के कमरे में लगा दी आग
- खिड़की के टूटे शीशे से अंदर दाखिल हुआ बंदर, बिजली की तार से छेड़छाड़
- बड़ा हादसा टला, समय रहते पा लिया आग पर काबू
- कमरे में फर्नीचर राख, आग ज्यादा फैलती तो काबू करना हो जाता है मुश्किल
विस्तार
आईजीएमसी शिमला में बंदर के उत्पात से एक डॉक्टर के कमरे में आग लग गई। कमरे से उठ रहे धुएं को कुछ तीमारदारों ने देखा और प्रबंधन को इस बारे में सूचना दी। आग को फैलने से पहले रोक दिया गया लेकिन कमरे में रखा कुछ फर्नीचर जल कर राख हो गया। अगर समय रहते पता नहीं चलता तो अस्पताल में बड़ा हादसा हो सकता था।
आईजीएमसी में आग से निपटने के लिए पहले से ही पुख्ता प्रबंध नहीं हैं। अग्निशमन महकमे की ओर से इस बारे में पहले ही आगाह भी कर दिया गया है। आग मेडिसन महकमे में कार्यरत एक प्रोफेसर के कमरे में लगी। रविवार को छुट्टी थी, लिहाजा सभी कमरे बंद थे, उस ओर आवाजाही भी बंद थी।
कमरे की खिड़की का शीशा टूट हुआ था। बताया जा रहा है कि यहां से बंदर कमरे में दाखिल हुआ और उछल कूद करने लगा। बताया जा रहा है कि इसी दौरान बिजली की तार से छेड़छाड़ हुई और शार्ट सर्किट हो गया। समय रहते आग पर काबू पा लिया गया।
कमरे में रखी किताबें भी फाड़ डाली
आग फैल जाती तो गंभीर मरीजों को वार्ड से सुरक्षित निकालना एक बड़ी चुनौती होती। बताया जा रहा है कि बंदर ने उत्पात मचाते हुए कमरे में रखी किताबें फाड़ डाली और कागज पूरे कमरे में बिखेर डाले। आग पर काबू पाने के लिए अस्पताल की दीवारों पर टंगे अग्निशमन यंत्र भी शोपीस बन कर रह गए हैं।
हादसे के समय इन्हें कैसे इस्तेमाल किया जाना है इस बारे में शायद ही किसी को कोई जानकारी हो। अग्निशमन महकमे ने पहले ही अस्पताल प्रबंधन को आगाह कर रखा है कि अगर कभी अस्पताल में भीषण अग्निकांड होता है तो ऐसे बहुत कम विकल्प मौजूद है। जहां से मरीजों, तीमारदारों, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को सुरक्षित बाहर भेजा जा सके।
क्या कहता है अस्पताल प्रबंधन- आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद ने कहा कि संभव है कि शार्ट सर्किट होने की वजह से यह हादसा हुआ हो। हादसे में कमरे में रखा कुछ फर्नीचर जल गया।