वीरभद्र की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं ये खुलासे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के आयकर रिटर्न की जांच में हुए खुलासे उनकी मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। वर्ष 2009 से 2013 के दौरान वीरभद्र सिंह के आयकर रिटर्न की जांच में करीब 15 करोड़ रुपये से ज्यादा के लेनदेन और आमदनी की जानकारियां सामने आई हैं।
इसके आधार पर मनी लांड्रिंग की जांच भी शुरू हो सकती है। आयकर विभाग अपनी इनवेस्टीगेशन विंग को भी वीरभद्र से जुड़े मामलों की पड़ताल में लगाने की तैयारी कर रहा है। आयकर विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वीरभद्र सिंह ने कई बार रिवाइज रिटर्न भरे हैं।
इसके बावजूद संपत्ति, आय और लेनदेन के कई मामलों में सवालिया निशान लग रहे हैं। आयकर विभाग इन मामलों की विस्तृत जांच का जिम्मा इनवेस्टीगेशन विंग को सौंपने की तैयारी कर रहा है। मामले की आहट वित्त मंत्रालय तक पहुंच चुकी है।
सबूत जुटा रहा विभाग
मंगलवार को आयकर विभाग की इनवेस्टीगेशन विंग के महानिदेशक राजेश चंद्र शर्मा की केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के आला अधिकारियों से मुलाकात हुई है। सीबीडीटी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वीरभद्र सिंह के मामले में आयकर विभाग पुख्ता सबूत जुटाने के भरसक प्रयास कर रहा है।
वीरभद्र सिंह के सामने सबसे ज्यादा मुश्किल उनके करीबी समझे जाने वाले उद्योगपति वाकामूला चंद्रशेखर के साथ हुए रुपयों के लेनदेन को जायज ठहराने में हो सकती है।
आयकर विभाग ने वीरभद्र के परिजनों और वाकामूला से जुड़ी कंपनियों के बीच करीब 7.5 करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी जुटाई है। बेनामी ट्रांजेक्शन और आय से अधिक संपत्ति का खुलासा करने वाले कई मामले ऐसे हैं, जिसमें आगे की जांच इनवेस्टीगेशन विंग करेगी।
प्रशांत भूषण ने दायर की है याचिका
गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी के नेता प्रशांत भूषण ने वीरभद्र सिंह पर आय से अधिक संपत्ति और मनी लांड्रिंग से जुड़े कई गंभीर आरोप लगाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।
लेकिन इससे पहले आयकर विभाग वीरभद्र सिंह के इनकम टैक्स असेसमेंट में मिली तमाम जानकारियों का ब्योरा हाईकोर्ट को भेजेगा। ईडी और सीबीआई पर बढ़ा दबाव वीरभद्र सिंह और वाकामूला चंद्रशेखर से जुड़े लोगों के बीच हुए रुपयों के लेनदेन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई पर मनी लांड्रिंग की जांच का दबाव बढ़ता जा रहा है।
आयकर विभाग भी अपनी इनवेस्टीगेशन विंग को मनी लांड्रिंग के सबूत हासिल करने के काम में लगाने जा रहा है। इसके अलावा वीरभद्र सिंह की कृषि के जरिए हुई आय में मूल रिटर्न और संशोधित रिटर्न के बीच कई गुने का अंतर है। कृषि से हुई आय पर इनकम टैक्स नहीं लगता, इसलिए कई बार लोग कृषि की आय को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं।