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पहले साल की स्कीमें भी अभी हवा में, भाजपा ने किया बहिष्कार
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 06 Feb 2016 10:07 AM IST
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हिमाचल में तीन साल बीतने के बाद भी कई विधायकों की प्राथमिकता स्कीमें धरातल पर नहीं उतर सकी हैं। वर्ष 2012 में सरकार बनने के बाद पहले साल की कई विधायक प्राथमिकता स्कीमों की अभी डीपीआर तक नहीं बन सकी है। प्राथमिकता स्कीमों के धरातल पर न उतरने से खफा कई भाजपा विधायकों ने अगले साल की स्कीमों के लिए बुलाई बैठक का बहिष्कार कर दिया है।
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भाजपा विधायकों का कहना है कि तीन साल पहले दी गई प्राथमिकता स्कीमों की सरकार डीपीआर तक तैयार नहीं कर सकी है। ऐसे में इस तरह की बैठकों का कोई औचित्य नहीं है। बैठक में आए विपक्ष के कई विधायक ने सरकार को भेदभाव तक के आरोप लगाए हैं। सत्ता पक्ष के कई विधायकों ने भी स्कीमों की डीपीआर न बनने पर सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को सचिवालय में डेढ़ बजे तक कांगड़ा, लाहौल-स्पीति और किन्नौर के विधायकों की बैठक बुलाई गई थी।
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कांगड़ा जिले से भाजपा का कोई भी विधायक बैठक में नहीं पहुंचे। भाजपा विधायक रविंद्र सिंह रवि ने कहा कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने पर वर्ष 2013-14 में विधायक प्राथमिकता की बैठक बुलाई थी। इसमें भाजपा विधायकों ने कर भाग लेकर पानी की सिंचाई, सड़क का निर्माण आदि प्राथमिकताएं दीं, लेकिन प्रदेश सरकार ने इस स्कीमों को स्वीकृति नहीं दी। डीपीआर की फाइलें सचिवालय और विभागों में लंबित पड़ी हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के कहने पर ही डीपीआर तैयार कर केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिए भेजी जा रही है। जब भाजपा विधायकों के काम नहीं होने हैं तो बैठक जाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि दो तीन मंत्रियों को छोड़कर किसी भी विधायक की स्कीमें स्वीकृति नहीं हो रही है। भाजपा विधायक सरवीण चौधरी विधानसभा कमेटी के सदस्यों के साथ हिमाचल से बाहर हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में भाजपा विधायकों की स्कीमों को स्वीकृति नहीं दी जा रही है। ऐसे में बैठक में उपस्थित होने का क्या फायदा। उन्होंने लिखित में अपनी प्राथमिकताएं देने की बात कही है। भाजपा विधायक विक्रम सिंह भी बैठक में उपस्थित नहीं थे।
पीएचसी-सीएचसी के लिए मानदंडों में छूट पर विचार
सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना के लिए बने नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रही है। शुक्रवार को विधायक प्राथमिकता बैठक में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने स्वास्थ्य विभाग से कहा कि राज्य की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों के मद्देनजर पीएचसी, सीएचसी की स्थापना को आबादी के मानदंडों में छूट पर विचार किया जाए। वर्तमान में पीएचसी की स्थापना को 30 हजार और सीएचसी के लिए करीब 80 हजार से एक लाख की आबादी के मानदंड हैं।
मुख्यमंत्री ने ट्यूबवेलों के निर्माण को भी योजना बनाने के लिए भी कहा।मुख्यमंत्री शुक्रवार को सरकार के आगामी बजट के लिए विधायकों की प्राथमिकताओं के निर्धारण को कांगड़ा, लाहौल-स्पीति, किन्नौर, चंबा, हमीरपुर और ऊना जिलों के विधायकों के साथ बैठकों के सत्र की अध्यक्षता की। बैठक में कुछ विधायकों ने वन अधिकार अधिनियम के कारण उनके विकास कार्यों में आ रहे व्यवधान का मुद्दा उठाया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वन क्षेत्र में एक हेक्टेयर की सीमा तक 13 सूचीबद्ध विकास गतिविधियां कार्यान्वित की जा सकती हैं। एक हेक्टेयर तक वन भूमि को विकास परियोजनाओं के लिए परिवर्तित किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित वन अधिकारी को शक्तियां दी गई हैं।
लिखित में देंगे अपनी प्राथमिकताएं
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि विधायक प्राथमिकता की बैठक में भाजपा नहीं, कांग्रेस के विधायक भी नहीं हैं। ये विधायक विधानसभा कमेटी की तरफ से बाहरी राज्य गए हैं। ये विधायक लिखित में अपनी प्राथमिकताएं देंगे। इन प्राथमिकताओं को कंसिडर किया जाएगा। कहा कि आगामी बजट सत्र में विधायक की प्राथमिकताओं को भी शामिल किया जाना है।
छोटी योजनाओं से लोगों की प्यास बुझाने की तैयारी
बैठक में चर्चा की गई कि बड़ी पेयजल अथवा सिंचाई योजनाओं को पूरा होने में लंबा वक्त लगता है। ऐसे में छोटी बस्तियों अथवा गांवों के समूह बनाकर लोगों की पेयजल जरूरतें पूरा करने को हैंडपंप उपलब्ध करवाए जाएं। कृषि विभाग के सभी 22 हैंडपंपों को सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग में लाने पर भी चर्चा की गई। राज्य में सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के लगभग 807 ट्यूबवेल हैं। इनके संचालन को तकनीकी रूप से सक्षम पर्याप्त मानव शक्ति को तैनात किया जा सकता है।
केंद्र से उठाएंगे स्वां नदी के तटीकरण का मुद्दा
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊना जिले में स्वां नदी तथा सहायक नदियों के तटीकरण के शेष कार्य को धनराशि शीघ्र जारी करने के लिए वह व्यक्तिगत तौर पर प्रधानमंत्री और केंद्रीय जल संसाधन मंत्री से मामला उठाएंगे। केंद्रीय मंत्रालय ने परियोजना के लिए पहले ही बजट निर्धारित किया है। इसे शीघ्र जारी करवाने के प्रयास किए जाएंगे।