छात्रवृत्ति घोटाला: जनजातीय विकास मंत्रालय ने लाभार्थी विद्यार्थियों के नाम-पते की सूची मांगी
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शिक्षा विभाग में उजागर हुए 150 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले को लेकर केंद्र सरकार सख्त हो गई है। छात्रवृत्ति घोटाले की रिपोर्ट मांगने के बाद अब जनजातीय विकास मंत्रालय ने प्री मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत जनजातीय वर्ग के लाभार्थी विद्यार्थियों की नाम और पते सहित सूची तलब की है।
मंत्रालय ने साल 2013 से 2016 तक जारी हुई छात्रवृत्ति राशि का संस्थानों सहित ब्योरा भी मांगा है। शिक्षा सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने बताया कि जल्द रिकार्ड एकत्र कर केंद्र सरकार को भेज दिया जाएगा।
शिक्षा विभाग ने केंद्र सरकार को भेजी रिपोर्ट में बताया है कि साल 2013-14 से लेकर 2016-17 तक 2.38 लाख अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति जारी की गई।
2772 शिक्षण संस्थानों को छात्रवृत्ति वितरित की
चार साल के दौरान कुल 2772 शिक्षण संस्थानों को छात्रवृत्ति वितरित की। इसमें 2506 सरकारी संस्थान और 266 निजी शिक्षण संस्थान शामिल रहे। निजी संस्थानों को 210 करोड़ और सरकारी संस्थानों को 56 करोड़ की राशि दी गई।
इस रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार ने शिक्षा विभाग से अनुसूचित जनजाति वर्ग के लाभार्थी विद्यार्थियों की अलग से सूची तलब की है। छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ केंद्र सरकार ने शिक्षण संस्थानों की जानकारी भी अलग से मांगी है।
बताया जा रहा है कि करीब साढ़े 31 हजार अनुसूचित जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी गई है। अब इनके नाम और पते का ब्यौरा एकत्र करने में विभाग जुट गया है। उधर, प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने की बात कही है।