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Shimla News: शांति विहार के भवन मालिक बोले, टनल निर्माण हो बंद, पुराने सर्वे पर बने फोरलेन

Fri, 09 Oct 2026 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2026 11:55 PM IST
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minister meet with peoples
फोरलेन ट्वीन टनल प्रभावित संघर्ष समिति से मिले पंचायती राज मंत्री
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आपदा को न्योता साबित होगा टनल का निर्माण, प्रभावितों के लिए उचित मुआवजे के लिए सरकार तय करे प्रक्रिया
मंत्री ने मामले को लेकर मुख्यमंत्री से भवन मालिकों की मुलाकात करवाने का दिया आश्वासन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कैथलीघाट-ढली फोरलेन में दो समानांतर टनल के निर्माण कार्य के दौरान शांति विहार में 15 मकानों में दरारें आने के बाद फोरलेन ट्वीन टनल प्रभावित संघर्ष समिति गठित की गई है। टनल निर्माण का विरोध कर रहे भवन मालिकों के साथ पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने शुक्रवार को सामुदायिक भवन में मुलाकात की। उन्होंने भवन मालिकों की शिकायतों को सुना। इस मौके पर एडीएम प्रोटोकॉल ज्ञान सागर नेगी भी मौजूद रहे।
पंचायती राज मंत्री ने भवन मालिकों की बात और शिकायतों को सुनने के बाद जल्द मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के साथ समिति के लोगों की बैठक करवाने का आश्वासन दिया। टनल निर्माण से प्रभावित हो चुके और भविष्य में टनल एलाइनमेंट में आने वाले करीब तीन सौ भवन मालिकों व समिति पदाधिकारियों ने ट्वीन टनल निर्माण का विरोध कर निर्माण बंद करवाने की मांग की।
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शांति विहार के पार्षद विनीत शर्मा और भट्ठाकुफर वार्ड के पार्षद नरेंद्र ठाकुर सहित पूर्व पार्षद महेंद्र चौहान, राजेंद्र चौहान और भवन मालिक विजय शर्मा, राजेंद्र चौहान, रमेश ठाकुर, अंशुल चौहान, आईडी शर्मा सहित अन्यों ने साफ शब्दों में कहा कि इस एलाइनमेंट के अनुसार टनल का निर्माण न किया जाए। पुराने सर्वे के अनुसार फोरलेन बने, जिससे लोगों की संपत्ति को नुकसान न हो।
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अंशुल चौहान ने कहा कि एनएचएआई की प्रारंभिक रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि टनल निर्माण में खास एहतियात, मॉनिटरिंग को उपकरण लगाने और सुरक्षा के कदम उठाने होंगे। ऐसा कुछ नहीं किया गया। दरारें आने के बाद हमारी शिकायत के बाद एनएचएआई जागा है। उन्होंने कहा कि यंग हिमालय क्षेत्र में यह पहला प्रयोग है कि इतनी घनी आबादी के नीचे से सौ मीटर तक की टनल का निर्माण किया जा रहा है। राजेंद्र चौहान ने कहा कि इन टनल के निर्माण से क्षेत्र में एक बड़ी आपदा को न्योता देना होगा।

एडीएम प्रोटोकॉल ज्ञान सागर नेगी ने कहा कि एनएचएआई से भवनों की सुरक्षा और रेस्टोरेशन करने का कार्य सरकार की ओर से पीडब्ल्यूडी को दिया जा रहा है, इसका प्रस्ताव एनएचएआई को दिया गया है। नेगी ने कहा कि एनएचएआई के पुराने सर्वे में करीब 12 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण कर छोड़ दिया गया। पुराने सर्वे में नेशनल हाईवे नहीं माना।

भवन मालिक आईडी शर्मा ने कहा कि चार मंजिला भवन में दरारें आई हैं। पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि सर्वे जहां से पहले हुआ था, फोरलेन वहीं से बने। 15 भवनों में दरारें हैं, करीब तीन सौ मकान भी खतरे में हैं। यह सब टनल निर्माण की वजह से हो रहा है। सरकार और प्रशासन भी हमारा साथ दे। फोरलेन निर्माण से जो नुकसान हुआ है, उन भवन मालिकों को कोई मुआवजा तक नहीं मिला है। सरकार इसकी प्रक्रिया तय करे।


पार्षद विनीत शर्मा ने कहा कि संघर्ष समिति में शामिल सभी भवन मालिकों की मांग है कि फोरलेन टनल का निर्माण बंद हो, फोरलेन पुराने सर्वे के अनुसार बनाया जाए। जिन भवनों को फोरलेन से नुकसान हुआ है, उन मकानों के संरक्षण को उचित कदम उठाए जाएं। भवन मालिकों को उचित मुआवजा देने के लिए सरकार के स्तर पर प्रक्रिया तय की जाए। जिनका नुकसान हुआ है, वो भवन मालिक आज तक भटक रहे हैं, उन्हें न्यायालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इन्हीं मुख्य मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष भी उठाया जाएगा।
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