हिमाचल प्रदेश: जेपी नड्डा बोले- केंद्र से करोड़ों की मदद, अधूरी परियोजनाएं पूरा करे राज्य सरकार
केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस पर प्रदेश सरकार को आगाह करते हुए कहा कि केंद्र से धनराशि मिलने के बाद उसका समय पर उपयोग करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।
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हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए केंद्र से करोड़ों रुपये मिले, लेकिन कई महत्वपूर्ण योजनाएं अब तक अधूरी हैं। केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस पर प्रदेश सरकार को आगाह करते हुए कहा कि केंद्र से धनराशि मिलने के बाद उसका समय पर उपयोग करना भी सरकार की जिम्मेदारी है। स्वास्थ्य ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं में देरी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को खर्च की रफ्तार बढ़ाकर अधूरे काम समय पर पूरे करने चाहिए। वहीं, किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि गृह मंत्री के प्रयासों से करीब 20 साल से अटकी परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए 15,624 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
नौ क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनाने के लिए 360 करोड़ दिन
नड्डा ने केंद्र से हिमाचल को मिलने वाली सहायता का ब्योरा रखते हुए कहा कि विकास के लिए धन की उपलब्धता के साथ योजनाओं का समय पर पूरा होना भी जरूरी है। कहा कि वर्ष 2021-22 में हिमाचल को नौ क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनाने के लिए 360 करोड़ रुपये दिए गए थे, लेकिन अब तक केवल एक ब्लॉक पूरा हुआ है। 12 एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं में से एक भी पूरी नहीं हुई। 73 ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों में से 29 का काम ही पूरा हो पाया है। प्रदेश सरकार को काम में तेजी लानी चाहिए। उन्होंने 15वें वित्त आयोग के तहत 521 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने और इनमें से 390 करोड़ रुपये खर्च होने की बात की। ऊना के बल्क ड्रग पार्क का मुद्दा उठाते हुए कहा कि परियोजना को 11 अक्तूबर 2022 को मंजूरी मिली थी, जबकि पर्यावरण मंजूरी वर्ष 2025 में मिली। केंद्र ने परियोजना के लिए एक हजार करोड़ रुपये की सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें से 225 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक 117 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं।
रेणुका बांध परियोजना के लिए सात हजार करोड़: नड्डा
उन्होंने सवाल उठाया कि जब परियोजना के लिए राशि जारी की गई है, तो उसका पूरा उपयोग करने और काम को गति देने में देरी क्यों हो रही है। नड्डा ने मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए 100 करोड़ रुपये के प्रावधान का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश सरकार ने यह योजना वापस कर दी थी। उनके अनुसार ऐसी परियोजनाएं उद्योग और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार को केंद्र की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सहायता का बेहतर इस्तेमाल करने की जरूरत बताई। किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना पर नड्डा ने कहा कि यह करीब दो दशक से विभिन्न राज्यों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण अटकी हुई थी। केंद्र के प्रयासों से अब इसे आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है। रेणुका बांध परियोजना के लिए सात हजार करोड़ रुपये और लुहरी चरण-एक के लिए 1,800 करोड़ रुपये का बजट है। हिमाचल में ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं के लिए केंद्र सहायता दे रहा है। ऐसे में प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है कि वह योजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करे और जनता को उनका लाभ मिले।
एनएचएआई के जरिये 55 हजार करोड़ की परियोजनाएं हिमाचल के सालाना बजट से ज्यादा
केंद्र से हिमाचल को पर्याप्त सहायता नहीं मिलने के आरोपों पर पलटवार करते हुए नड्डा ने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों की करीब 55 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं चल रही हैं। तंज कसते हुए कहा कि एनएचएआई के माध्यम से दी जा रही राशि हिमाचल के सालाना बजट से भी अधिक है। 2024-25 में हिमाचल को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता के तहत 2,381 करोड़ रुपये दिए।
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में 4,170 सड़कें बनीं,नौ सड़कें अब भी अधूरी
नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत हिमाचल में 4,170 सड़कों का निर्माण किया गया है। इन पर 13,697 करोड़ रुपये खर्च किए गए और कुल 26,506 किलोमीटर सड़कें बनी हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में करीब 58 प्रतिशत सड़कें इस योजना के तहत बनाई गई हैं। योजना के पहले चरण की नौ सड़कें अब भी अधूरी हैं। इन्हें पूरा करने के लिए मार्च 2027 तक की विस्तारित समयसीमा दी गई है। उन्होंने आगाह किया कि इसके बाद पहले चरण के लिए और धनराशि मिलना संभव नहीं होगा।