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उम्मीदों की मशाल: पैदल यात्रा कर लोगों को स्वस्थ रहने का संदेश दे रहे मिलिंद मांझी
Fri, 22 Apr 2022 08:12 PM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, सुंदरनगर(मंडी)
संवाद न्यूज एजेंसी, सुंदरनगर(मंडी)
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 22 Apr 2022 08:12 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल के हुबली मिलिंद कुमार मांझी (26) का पहले सपना था कि लेह-लद्दाख और खारदूंगला को देखने के लिए मोटरसाइकिल पर जाना है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह मोटरसाइकिल नहीं खरीद पाए। उन्होंने इस यात्रा को पैदल करने की ठानी।
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मिलिंद कुमार मांझी।
- फोटो : संवाद
विस्तार
लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए पश्चिम बंगाल के मिलिंद मांझी पैदल यात्रा कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल के हुबली मिलिंद कुमार मांझी (26) का पहले सपना था कि लेह-लद्दाख और खारदूंगला को देखने के लिए मोटरसाइकिल पर जाना है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह मोटरसाइकिल नहीं खरीद पाए। उन्होंने इस यात्रा को पैदल करने की ठानी। अब तक 60 दिन में मांझी 1,800 किमी का पैदल सफर कर चुके हैं। 22 फरवरी को हुबली से पैदल यात्रा शुरू की है। शुक्रवार को मिलिंद कुमार मांझी हिमाचल प्रदेश के मंडी के सुंदरनगर पहुंचे। यहां समाजसेवी संगठनों ने उनका स्वागत किया और आर्थिक मदद की पेशकश की।
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लेकिन, मिलिंद ने मदद लेने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि जो सपना देखा है, उसे अपने दम पर पूरा करेंगे। मिलिंद ने बताया कि 100 दिन में 2,500 किलोमीटर सफर कर लेह-लद्दाख और खारदुंगला पहुंचने का लक्ष्य रखा है। रोजाना 30 किमी पैदल सफर करते हैं। सुबह और दोपहर का भोजन वह खुद के पैसों से करते हैं। जहां रात्रि ठहराव होता है, वहां लोग उसे खाना खिला देते हैं। मांझी ने बताया उन्होंने स्नातक की पढ़ाई के बाद मेकेनिक का शॉर्ट टर्म कोर्स किया। स्टील फैक्ट्री में कार्य किया। कोरोना काल के चलते फैक्ट्री बंद हो गई और नौकरी चली गई। इसके बाद वह हुबली में अपने पिता के साथ चाय की दुकान में काम करता रहा। परिवार की हालत ऐसी है कि महज दो वक्त की रोटी जुटा पाते हैं। लेकिन, सपना जो मन में संजो रखा था उसे पूरा करने के लिए वह पैदल की घर से निकल पड़े।
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