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हाईड्रा क्रेन की चपेट में आने से मैकेनिकल इंजीनियर की मौत

Sun, 21 Oct 2018 01:26 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बद्दी (सोलन)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बद्दी (सोलन) Updated Sun, 21 Oct 2018 01:26 PM IST
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Mechanical engineer died in hydra crane accident in baddi himachal pradesh

बद्दी की एक नामी टैक्सटाइल मिल में हाईड्रा क्रेन की चपेट में आने से एक इंजीनियर की मौत हो गई। हाईड्रा क्रेन की चपेट में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को स्थानीय अस्पताल लाया गया जहां से उसे प्राथमिक उपचार के बाद पीजीआई रेफर किया गया जहां उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने घटना की सूचना मिलते ही मौके का दौरा कर हादसे के कारणों की पड़ताल शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक बद्दी स्थित नामी टैक्सटाइल मिल के परिसर में एक इंजीनियर हाईड्रा क्रेन की चपेट में आ गया।

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मृतक घटना के समय पैदल जा रहा था कि इसी बीच एक हाईड्रा क्रेन ने उसे पीछे से टक्कर मार दी। उसे प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर अवस्था में पीजीआई रेफर किया गया। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान टैक्सटाईल मिल में कार्यरत मैकेनिकल इंजीनियर आयुष गर्ग पुत्र प्रताप चंद निवासी गुजरात के रूप में हुई है। पुलिस ने हाईड्रा क्रेन के चालक यादव को मौके से गिरफ्तार कर लिया है। डीएसपी बद्दी खजाना राम ने बताया कि पुलिस ने लापरवाही का मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

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दो साल में 10 कामगार गए मौत के मुंह में

Mechanical engineer died in hydra crane accident in baddi himachal pradesh

औद्योगिक क्षेत्र बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ में काम कर रहे मजदूर-कामगार हादसे का शिकार हो जाते हैं जिसके बाद परिजनों को दर-दर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है। औद्योगिक श्रमिकों के कल्याणार्थ प्रदेश और केंद्र सरकार की कोई स्पष्ट नीति न होने से मजदूर मौत के मुंह में समा रहे हैं। हादसे का शिकार श्रमिकों के परिवारों की इसके बाद खै-खबर लेने वाला तक कोई नहीं रहता। इसके लिए न तो केंद्र और न प्रदेश सरकार ही  उनका पुनर्वास करती है। मरने के बाद उद्योग प्रबंधक भी ऐसे परिवारों को थोड़ा बहुत अनुदान देकर परिवारों से पल्ला झाड़ लेते हैं।

जानकारी के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन मेें पिछले दो साल में उद्योगों में काम करते हुए करीब एक दर्जन मजदूरों की जान गई है। मजदूर शक्ति का औद्योगिक क्षेत्र के निर्माण में बहुत बड़ा योगदान होता है और कोई भी कारखाना मजदूर के बगैर नहीं चल सकता। ऐसे में मजदूरों की मौत उनके परिवारों के लिए एक काला अध्याय साबित होती है, उनका जीवन भी तिल-तिल कर मरने के समान होता है। गत दिनों 21 सितंबर को बद्दी के चॉकलेट उद्योग में जो मजदूर मरा था उसके साथियों ने यह आरोप लगाया था कि उससे जबरन 12 घंटे काम लिया जा रहा था और वर्क लोड ज्यादा होने के बाद भी उसको हैल्पर नहीं दिया गया फलस्वरुप वो मशीन पर गिर पड़ा। मजदूरों का कहना था ऐसे मामलों में हत्या का का मामला दर्ज होना चाहिए।  

मृतक के परिजन को मिले सरकारी नौकरी : राजकुमार
जनशक्ति मजदूर सभा के प्रदेशाध्यक्ष राजकुमार चौधरी का कहना है जिस तरह सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी पर मौत होने पर करुणामूलक आधार पर उनके परिजनों को नौकरी मिली है, उसी तर्ज पर मजदूर के मरने पर उसके परिजनों को हिमाचल या केंद्र सरकार नौकरी प्रदान करे। केंद्र सरकार कोई ऐसी नीति बनाए क्योंकि मजदूर किसी एक राज्य का न होकर अनेक राज्यों में काम करके वहां के विकास में योगदान देता है। या तो उसके परिजन को गृह जिले में नौकरी मिले या जिस राज्य के उद्योग में काम के दौरान उसकी मौत हो वहां की राज्य सरकार परिजनों को नौकरी दे।

उद्योगपति व सरकार मजदूर का अलग बीमा कराए

Mechanical engineer died in hydra crane accident in baddi himachal pradesh

हिंद मजदूर सभा के प्रदेशाध्यक्ष मेला राम चंदेल ने कहा कि सरकार व उद्योग मिलकर ऐसी बीमा पॉलिसी करवाएं जिसमें मृतक मजदूर के परिवार को इतना पैसा मिले जिससे उनका ताउम्र गुजारा भत्ता हो सके। उन्होंने कहा कि मौत के बाद जो पेंशन मिलती है उससे परिवार का गुजारा नहीं हो पाता। न ही बच्चों की पढ़ाई और शादी हो पाती है। केंद्र सरकार इसको लेकर स्पष्ट नीति बनाए ताकि पीड़ित परिवार के ज मों पर मरहम लग सके। बीमे का पैसा इतना हो कि उस परिवार को परेशानियों का सामना न करना पड़ा।   

मृत्यु पर होती है पूरी मदद : उद्योग संघ
बीबीएन उद्योग संघ के प्रधान शैलेष अग्रवाल ने कहा कि ऐसा हादसा होने पर उद्यमी पीड़ित परिवार की पूरी मदद करता है। ईएसआई पीएफ के अलावा मृतक के परिजनों की पूरी मदद होती है। हम उनके परिजनों को नौकरी का आवेदन भी देता है लेकिन कई बार अन्य राज्य के होने के कारण और प्रवासी मजदूर होने के कारण नौकरी लेना पसंद नहीं करता। ऐसा प्रयास रहता है कि पीड़ित परिवारों का पुनर्वास हो जाए। 

केंद्र सरकार बना पॉलिसी : लघु उद्योग भारती
लघु उद्योग भारती के बद्दी के महासचिव आलोक सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार बरसों पुराने एक्ट में तबदीली कर ड्यूटी पर तैनात मजदूर की मौत होने पर मुआवजे और पेंशन की अलग नीति बनाए। उद्योग ऐसे मामलों पीड़ित परिवारों की यथासंभव मदद करते हैं।

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