हाईकोर्ट की सख्ती के बाद पार्षदों ने साध ली अब चुप्पी
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हाईकोर्ट के सख्त आदेशों के बाद किराया बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर कारोबारियों और पार्षदों के तेवर नरम पड़ गए हैं। लेकिन व्यापारमंडल के दोफाड़ होने से अब गंज बाजार का किराया कम तय करने पर घमासान शुरू हो गया है। कारोबारी जो अब तक किराया बढ़ाने का विरोध कर रहे थे। अब इनका एक गुट गंज बाजार का किराया कम रखने पर सवाल उठाने लगा है।
नगर निगम ने जो प्रस्ताव तैयार किया है, उसमें गंज बाजार में 25 रुपये प्रतिवर्ग फुट किराया निर्धारित किया है। यह शहर में सबसे कम है। उपनगरों में भी इससे दस रुपये ज्यादा यानि 35 रुपये वर्ग फीट किराया तय किया है। ऐसे में व्यापारियों का एक गुट इस कम किराये का विरोध करने लगा है। इनका कहना है कि गंज में ज्यादातर कारोबारी भाजपा समर्थित हैं।
यह कारोबारी अपनी अलग एसोसिएशन बनाकर स्थानीय विधायक एवं शिक्षा मंत्री से भी मिल चुके हैं। ऐसे में यहां का किराया सबसे कम तय किया है। इसे बढ़ाया जाना चाहिए। शहर के कोर एरिया में किराया एक बराबर होना चाहिए। कई पार्षद अब इसका समर्थन करने लगे हैं। सदन में गंज के कम किराये पर हंगामा होने के आसार हैं।
व्यापारमंडल दो गुटों में बंट गया है। नया गुट गंज के कारोबारियों का है जिसमें 103 कारोबारियों ने चुनाव में हिस्सा लिया था। इसमें ज्यादातर कारोबारी भाजपा को समर्थन करते हैं। दूसरा गुट व्यापार मंडल का है जिसमें पांच सौ से ज्यादा कारोबारी है। व्यापारमंडल के अध्यक्ष कांग्रेस पार्षद इंद्रजीत सिंह है।
पार्षद बोले, हर हाल में बढ़ाया जाए किराया
शिमला। 30 नवंबर को होने वाली मासिक बैठक में स्पेशल हाउस अचानक रद्द किए जाने के फैसले पर हंगामा होने के आसार हैं। कांग्रेस पार्षद राकेश चौहान, दिवाकर देव शर्मा ने कहा कि किराये के मुद्दे पर सदन में चर्चा होनी थी। ऐसे में अचानक इसे रद्द करना गलत है।
निगम प्रशासन अब जो कमेटियों की रिपोर्ट न मिलने का बहाना बना रहा है, वह सही नहीं। यदि रिपोर्ट मिली नहीं थी तो फिर सदन क्यों बुलाया? राकेश चौहान ने कहा कि कई दुकानों का किराया काफी कम है, इसे बढ़ाया जाना चाहिए।
45 से 82 पैसे प्रतिवर्ग फीट वसूला जा रहा है किराया, लाखों की है आमदनी
कमाई लाखों में लेकिन किराया पैसों में है। चौंकिए मत। लाखों रुपये की आमदनी देने वाली इतने कम किराये वाली यह दुकानें कहीं देहात में नहीं बल्कि शिमला शहर के बीचोंबीच बसे गंज बाजार में चल रही हैं। नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक गंज बाजार में दुकान नंबर 43 से 61 पैसे, 42 से 82 पैसे, 44 से 77 पैसे, 45 से 61 पैसे, 48 से 82 पैसे प्रतिवर्ग फीट के अनुसार किराया वसूला जा रहा है।
इसके अनुसार दो सौ वर्ग फीट वाली दुकान का किराया दो सौ रुपये से भी कम बनता है। यानि साल का ढाई हजार से भी कम किराया है। इस बाजार में वर्तमान कीमतें दो सौ रुपये प्रतिवर्ग फीट से अधिक पहुंच गई हैं। इसके अनुसार किराया 30 से 50 हजार रुपये बनता है। लेकिन कारोबारी एक रुपये से भी कम दरें होने के बावजूद किराया बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। नगर निगम ने यहां के लिए 25 रुपये प्रतिवर्ग फीट के अनुसार किराया तय किया है, जिसे कारोबारी काफी ज्यादा बता रहे हैं।
मालरोड और मिडल बाजार में भी दरें कम
मालरोड पर नगर निगम की दुकानों का किराया औसतन सौ रुपये प्रतिवर्ग फीट है जबकि वर्तमान में यहां का किराया 569 रुपये प्रतिवर्ग फीट बनता है। मिडल बाजार में भी ऐसी ही हालत है। यहां वर्तमान बाजार कीमतों के अनुसार किराया 372 रुपये प्रतिवर्ग फीट वसूला जा रहा है जबकि निगम की दुकानों में यह सौ रुपये प्रतिवर्ग फीट से भी कम है।
सबलेट की दुकानों की पगड़ी लाखों में
नगर निगम से ली कई दुकानें सबलेट भी हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार सब्जी मंडी में निगम की एक दुकान 92 लाख में सबलेट होने का मामला सामने आया है। इसके अलावा लोअर बाजार में एक दुकान सवा करोड़ रुपये में सबलेट करने की चर्चा है।
जल्द बुलाएंगे स्पेशल हाउस
कोर्ट के आदेशों की पालना करने के लिए जल्द ही स्पेशल हाउस बुलाकर नई दरों को तय किया जाएगा। पार्षदों की सहमति के बाद जो भी दरें तय होंगी, वही लागू की जाएगी। - कुसुम सदरेट, नगर निगम महापौर
किराया दोगुना देने को भी तैयार कारोबारी
मानते हैं कि कई दुकानों का किराया काफी है। हम इसका दोगुना किराया देने को भी तैयार हैं। लेकिन निगम ने एरिया वाइज जो किराया तय किया है, वह कारोबारी नहीं दे पाएंगे। निगम एक बार हमारा पक्ष भी सुने। - दीपक श्रीधर, प्रधान अनाज मंडी ट्रेर्ड्स एसोसिएशन