लोकसभा चुनाव 2019: सुखराम ने आंसू बहाकर पोते के लिए खेला सहानुभूति कार्ड
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले पंडित सुख्रराम अपने कांग्रेस प्रत्याशी पोते के नामांकन के दिन मंच से चुनावी हुंकार भरते नहीं, बल्कि रोते हुए दिखे। अपने घर मंडी में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और जुटी भीड़ के आगे पोते के साथ आंसू बहाते हुए सुखराम ने उम्र के इस पड़ाव में सहानुभूति कार्ड बखूबी खेला। भाजपा विधायक अपने बेटे अनिल शर्मा को याद करते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से माफी मांगी कि वह कांग्रेस के इस मंच पर अनिल को नहीं ला सके।
साथ ही मौजूद भीड़ से यह कहते हुए माफी मांगी कि अगर उनसे और उनके परिवार से कोई भूल चूक हुई है तो उन्होंने भीड़ को अपने लोग कहकर अपनी उम्र 94 साल का जिक्र करते हुए माफी मांगी। उधर, इस सीन के लोग कई मायने निकाल रहे हैं। कई लोग दादा पोते के यह भावुक पल मान रहे हैं तो कुछ इन आंसूओं को घड़ियाली करार दे रहे हैं।
लेकिन एक बात तो तय है कि जिस तरह से मंडी में नामांकन के दिन सुखराम परिवार ने भीड़ जुटाकर शक्ति प्रदर्शन किया है, उससे सुखराम ने साख मनवाई है। वहीं एक मंच पर वीरभद्र और सुखराम का साथ होना और महज तीन मिनट के भाषण में कहना कि समझदार को ईशारा ही काफी है, बाकि बोल चुके मैं दोहराऊंगा नहीं, दोहराना बुद्धिमता नहीं और इसके बाद आश्रय के लिए वोट मांगना, वीरभद्र के इस व्यवहार के भी कई मतलब निकल रहे हैं।
वहीं भीड़ जुटाने के भी कई मायने निकाले जा रहे हैं। भाजपाई इसे किराये की भीड़ करार दे रहे हैं। हालांकि चुनावी परिणाम ही बताएगा कि नामांकन के दिन जुटाई भीड़ किराये की भीड़ थी या जीत की पृष्ठभूमि।