सियासी पिच पर आखिरी ओवर में राहुल का मोदी पर बाउंसर
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लोकसभा चुनाव की सियासी पिच पर प्रचार रूपी आखिरी ओवर में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कई बाउंसर डाले। राहुल गांधी ने हिमाचल की जनता को एक के बाद एक वो तमाम वादे याद दिलाए, जिन्होंने वर्ष 2014 में चारों सीटें भाजपा की झोली में डाल दी थीं।
उन्होंने किसान, बागवान, महिला, बेरोजगारों और छोटे कारोबारियों पर फोकस किया। राहुल इस बार पूरा होमवर्क कर सोलन पहुंचे थे। हर वर्ग की दुखती रग पर हाथ रखा। उन्होंने किसानों की बात छेड़ी तो टोमैटो केचप फैक्टरी, फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट के सवाल उठाए।
बागवानों की बात शुरू की तो देश में चाइना से सेब आयात करने और आयात शुल्क न बढ़ाने पर निशाना साधा दिया। सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र के हाटी समुदाय को जनजातीय दर्जा न देने पर खूब घेरा।
उन्होंने बेहद सफाई से इन सबके बीच न्याय योजना का जिक्र किया। इसके माध्यम से वे महिलाओं, बेरोजगारों और छोटे कारोबारियों को साधने की कोशिश करते नजर आए। हिमाचल में शिमला संसदीय क्षेत्र टमाटर उत्पादन में सबसे आगे है।
आयात शुल्क दोगुना होने की उम्मीद पर पानी फिरा
यहां अरबों रुपये के टमाटर का कारोबार होता है और सोलन का टमाटर पड़ोसी देश पाकिस्तान और विदेशों तक जाता रहा है। वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान किसानों की बड़ी मांग टमाटर केचप फैक्ट्री और प्रोसेसिंग यूनिट शुरू करने की थी।
जो सरकार बनने के बाद पूरा नहीं हो पाया। ऐसा ही मसला सेब बागवानों का भी था, जो आयात शुल्क दोगुना होने की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन यह निर्णय भी खटाई में ही रहा। प्रधानमंत्री हाल ही में सोलन के ठोडो मैदान में जनसभा को संबोधित करके लौटे हैं।
उन्होंने यहां देशहित के तमाम मुद्दों पर करीब 32 मिनट तक भाषण दिया, लेकिन पूर्व के वादों पर कोई बात नहीं की। राहुल गांधी ने इन्हीं मुद्दों को अपने आखिरी ओवर में हथियार बनाया और हिमाचल खासतौर पर शिमला संसदीय क्षेत्र को साधने में पूरी ताकत झोंक दी।
पहले बदला जाता अध्यक्ष तो सत्ता में होती कांग्रेस : वीरभद्र
चुनाव की आखिरी बेला में राहुल गांधी के सामने वीरभद्र सिंह का सियासी बाण सुखविंद्र सिंह सुक्खू को भेद गया। वीरभद्र सिंह खुद को सुक्खू पर हमला बोलने से नहीं रोक पाए।
शुरुआत तो उन्होंने मौजूदा अध्यक्ष कुलदीप राठौर की तारीफ से की थी, लेकिन बात के अंत में सुक्खू पर निशाना साध दिया। बकौल वीरभद्र सिंह अब कांग्रेस की जनसभाओं को देखकर लगता है कि मौजूदा अध्यक्ष काफी मेहनत कर रहे हैं।
अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। यदि यह बदलाव एक साल पहले हुआ होता तो कांग्रेस सत्ता से बेदखल ही नहीं होती। हालांकि, बाद में बात संभालते हुए उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी पर निशाना साधना नहीं है।