हिमाचल: तीन साल में 67 बार महसूस हुए भूकंप के झटके, अब 100 वैज्ञानिक उपकरण करेंगे निगरानी
बीते तीन वर्षों में एक अगस्त 2026 तक प्रदेश में 67 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। इससे निजी संपत्ति को करीब 7.05 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। इसमें सबसे अधिक 4.55 लाख रुपये का नुकसान चंबा और 2.50 लाख रुपये का नुकसान लाहौल-स्पीति में आंका गया है।
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हिमाचल प्रदेश भूकंप के लिहाज से संवेदनशील बना हुआ है। बीते तीन वर्षों में एक अगस्त 2026 तक प्रदेश में 67 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। इससे निजी संपत्ति को करीब 7.05 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। इसमें सबसे अधिक 4.55 लाख रुपये का नुकसान चंबा और 2.50 लाख रुपये का नुकसान लाहौल-स्पीति में आंका गया है। यह जानकारी राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने विधानसभा में विधायक विपिन सिंह परमार के सवाल के लिखित जवाब में दी। आंकड़ों के अनुसार तीन साल की अवधि में चंबा में 26 बार भूकंप महसूस किया गया।
इसके बाद लाहौल-स्पीति में 14, किन्नौर में सात, कांगड़ा में चार और शिमला में दो बार भूकंप के झटके महसूस हुए। अन्य जिलों में भी भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की गई हैं। राजस्व मंत्री ने बताया कि इस अवधि में प्रदेश में सबसे अधिक तीव्रता वाला भूकंप चार अप्रैल 2024 को चंबा जिले में आया था। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.3 मापी गई थी। भूकंप के लिहाज से संवेदनशील हिमाचल में इस तरह की गतिविधियों को देखते हुए सरकार निगरानी और पूर्व चेतावनी तंत्र को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
सरकार की ओर से प्रदेश में भूकंप की पूर्व चेतावनी और त्वरित सूचना के लिए सेंसर और अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं। भूकंप की निगरानी और पूर्व चेतावनी व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए वैज्ञानिक उपकरणों का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। राजस्व मंत्री के अनुसार नेशनल इंस्ट्रूमेंटेशन नेटवर्क प्रोजेक्ट के तहत हिमाचल प्रदेश में करीब 100 वैज्ञानिक उपकरण स्थापित किए जाने प्रस्तावित हैं। इससे प्रदेश में भूकंप की गतिविधियों की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
परियोजना के पहले चरण में बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, शिमला और सोलन जिलों में चिह्नित स्थानों पर 10 वैज्ञानिक उपकरण स्थापित करने की योजना है। इनमें से बिलासपुर में एक, चंबा में दो, हमीरपुर में एक, मंडी में एक और सोलन में एक उपकरण स्थापित किया जा चुका है। इन उपकरणों की स्थापना का कार्य राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की ओर से हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के समन्वय से किया जा रहा है। इससे प्रदेश के भूकंप संभावित क्षेत्रों में निगरानी तंत्र मजबूत होने और भूकंप की स्थिति में त्वरित सूचना उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।