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Shimla News: हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजायाफ्ता हाईकार्ट से बरी

Tue, 08 Aug 2023 11:25 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Aug 2023 11:25 PM IST
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life sentence for murder
Convicted acquitted by High Court
सत्र न्यायाधीश की अदालत ने ठहराया था दोषी
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बीएसएनएल कार्यालय के पास गाड़ी में मिला था शव
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल हाईकोर्ट ने परिस्थितिजन्य आधार पर दोषसिद्धि के फैसले को पलटते हुए हत्या के जुर्म में उम्रकैद सजायाफ्ता को बरी कर दिया है।

न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने अर्की निवासी आशा देवी की अपील को स्वीकार किया है। अदालत ने उसे तुरंत रिहा करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि इस मामले में कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। परिस्थितिजन्य आधार पर दोषसिद्ध किया है। अदालत ने कहा कि परिस्थितिजन्य आधार पर सजा सुनाए जाने के लिए परिस्थितियों की श्रृंखला पूरी होनी जरूरी है। अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से परिस्थितियों की श्रृंख्रला पूरी नहीं है। अभियोजन पक्ष ने मृतक की पत्नी की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की थी। पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि मृतक सुशील कुमार बीएसएनएल में एजीएम के पद पर तैनात था। 30 जून 2012 को वह सोलन था लेकिन उसके बाद घर वापस नहीं आया। दूसरे दिन उसकी लाश गाड़ी में बीएसएनएल कार्यालय के पास मिली थी।


पुलिस ने शक के दायरे में अपीलार्थी से पूछताछ की और जांच में पाया कि अपीलार्थी को सुशील कुमार ने अनुबंध आधार पर वर्ष 2011 में बीएसएनएल में नियुक्त किया था। इसका अनुबंध खत्म होने के बाद सुशील कुमार ने उसे अपने दोस्त की कंपनी में नौकरी पर रख दिया था। मामले की जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने सत्र न्यायाधीश सोलन की अदालत में चालान पेश किया। विचारण अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड और गवाहों के बयान के आधार पर अपीलार्थी को सुशील कुमार की हत्या के लिए दोषी ठहराया था। इस जुर्म के लिए विचारण अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस निर्णय को अपीलार्थी ने अपील के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सत्र न्यायाधीश के फैसले को पलटते हुए यह निर्णय सुनाया।
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