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खराब मौसम में भी नहीं डिगा हौसला, लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा ने साझा किए जज्बात

Tue, 12 Jun 2018 09:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मौहल (कुल्लू)
अमर उजाला ब्यूरो, मौहल (कुल्लू) Updated Tue, 12 Jun 2018 09:31 AM IST
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lieutenant commander pratibha jambal interview
PIC

हिमाचल की जांबाज लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जम्वाल ने कहा कि नाविका सागर परिक्रमा के दौरान मौसम ही सबसे बड़ी चुनौती रही। बर्फबारी, बारिश, तेज धूप और खराब मौसम के बीच सफर करने का अलग अनुभव रहा। देश और दुनिया में हिमाचल और कुल्लू का नाम रोशन करने वाली लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा कुल्लू पहुंच गई हैं।

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वे परिवार के साथ दो सप्ताह का समय गुजारेंगी। कुल्लू के मौहल स्थित अपने घर पहुंचने पर जनप्रतिनिधियों के अलावा स्थानीय लोगों ने प्रतिभा का भव्य स्वागत किया। पत्रकारों से बातचीत में प्रतिभा ने कहा कि करीब 37 फीट लंबी छोटी सी नौका पर खराब मौसम के बीच सागर परिक्रमा करना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।
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140 किलोमीटर प्रति घंटा रफ्तार की तेज हवाओं का सामना करना पड़ा। 30 फुट ऊंची लहरों के बीच भी सफर तय किया। टीम के किसी भी सदस्य ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते गए। 
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तीन बार हुआ खतरनाक तूफान से सामना- प्रतिभा ने कहा कि सफर के दौरान तीन बार खतरनाक तूफान से सामना हुआ। सबसे पहले तूफान का सामना ऑस्ट्रेलिया जाते वक्त हुआ। करीब 20 घंटे तक तूफान के बीच टीम आगे बढ़ती रही। दूसरे तूफान का सामना रात को करीब 12 से 13 घंटे तक हुआ।

तीसरे तूफान का सामना मॉरिशस के पास करीब 15 घंटे के लिए हुआ। प्रकृति का भयानक रूप देखकर डर तो लगा, लेकिन टीम ने हौसला बनाए रखा। एक जगह 45 दिन तक दूर-दूर तक पानी के अलावा कुछ नहीं दिखा। 45 दिन सफर के बाद आसपास बोट दिखी।

254 दिन में पूरी हुई सागर परिक्रमा में 199 दिन टीम समुद्र में रहीं। अन्य दिन विभिन्न पड़ावों में गुजारे। यहां टीम ने विभिन्न प्रतिष्ठित लोगों से मुलाकात की और अपने अनुभव साझा किए। प्रतिभा ने कहा कि बेटियां को किसी भी क्षेत्र में कम न आंके। प्रतिभा के पिता रवि जम्वाल ने कहा कि बेटी की उपलब्धि ने उनका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। 


प्रतिभा ने रखा था बोट का नाम तारिणी- छोटी सी नौका पर सवार होकर सागर परिक्रमा करने वाली टीम सदस्य प्रतिभा ने ही बोट का नाम तारिणी रखा था। यह एक देवी का नाम भी है। जिसे समुद्री यात्रा करने वाले पूजते हैं। इस संबंध में एक आर्टिकल पढ़ने के बाद प्रतिभा ने बोट को यह नाम दिया था।

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