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बसों में टिकट काटना नहीं चाहती महिला कंडक्टर, फील्ड ड्यूटी से बचने को कर रहीं ये जुगाड़
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Tue, 12 Sep 2017 03:10 PM IST
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एचआरटीसी में महिला कंडक्टर (टीएमपीए) फील्ड में सेवाएं देने को तैयार नहीं हैं। अफसरों के साथ इनके परिजनों की अच्छी पैठ होने के कारण ये महिला कंडक्टर दफ्तर में ही तैनात हैं। हाल ही में हाईकोर्ट ने निगम प्रबंधन को महिला कंडक्टरों की सेवाएं फील्ड में लेने के आदेश दिए हैं।
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ऐसे में अब जब इनकी सेवाएं फील्ड में लेने की बारी आई तो इन महिला कंडक्टरों में से अधिकतर अनफिट हो गई हैं। उन्होंने बसों में टिकट काटने के झंझट से छुटकारा पाने के लिए निगम प्रबंधन को मेडिकल थमा दिए हैं। महज तीन से चार महिलाएं ही ऐसी हैं, जो शहर के लोकल रूटों पर टिकट काट रही हैं।
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हालांकि, हाईकोर्ट के आदेशों के बाद निगम प्रबंधन ने महिला कंडक्टरों की फील्ड में ड्यूटी देने के आदेश दिए हैं। महिला कंडक्टर शहर के लोकल रूटों पर शाम को पांच बजे तक सेवाएं देंगी। एचआरटीसी में 100 से अधिक महिला कंडक्टर हैं।
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इनमें कई करुणामूलक आधार पर नौकरी पर लगी हैं, जबकि कइयों की टीएमपीए की परीक्षा पास कर इस पद पर तैनाती हुई है। निगम प्रबंधन ने जब टीएमपीए के लिए लोगों से आवेदन मांगे थे तो उस समय इन महिलाओं ने कंडक्टर लाइसेंस के साथ निगम प्रबंधन को स्वस्थ होने का मेडिकल भी दिया था। उधर, परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा कि यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट से इस मामले में आदेश जारी हुए हैं।
परीक्षा पास करने वाली महिलाओं को जाना चाहिए फील्ड में
एचआरटीसी संयुक्त समन्वय समिति के सचिव राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि एचआरटीसी में कई महिलाएं ऐसी हैं, जो पति के मृत्यु के बाद नौकरी पर लगी हैं। इन्हें छोड़कर अन्य जिन महिलाओं ने टीएमपीए की परीक्षा पास की है, उन्हें दफ्तर में बैठने के बजाय फील्ड में सेवाएं देनी चाहिए। चूंकि, ये महिलाएं पहले से ही कंडक्टर की नौकरी का मन बनाकर आई हैं।