शिमला रेप केस: CBI को मिला साइंटिफिक सबूत, 7 बिंदुओं पर आगे बढ़ी जांच
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बहुचर्चित कोटखाई गुड़िया दुराचार और हत्या मामले में हिमाचल हाईकोर्ट ने कड़ा रुख दिखाते हुए सीबीआई निदेशक को अपना निजी हलफनामा दायर कर स्टेटस रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। सीबीआई ने कोर्ट में सील्ड कवर में स्टेटस रिपोर्ट पेश की।
रिपोर्ट के अवलोकन के बाद अदालत ने पाया कि इस प्रकरण को सुलझाने में जरूरत से ज्यादा समय लग रहा है। सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि यह मामला ब्लाइंड मर्डर केस है। इसकी जांच अधिकांश वैज्ञानिक विश्लेषण पर निर्भर हो गई है।
हाल ही जांच में उन्हें कुछ नई लीड हाथ लगी है। सात बिंदुओं पर छानबीन चल रही है। इसलिए यह यह कहना सही नहीं होगा कि यह मामला सुलझ नहीं सकता है।
अब इस मामले पर अगली सुनवाई 10 जनवरी को होगी। कोर्ट ने सुनवाई के बाद आम लोगों से भी आग्रह किया कि अगर गुड़िया मामले को सुलझाने से जुड़े किसी भी तथ्य की जानकारी उनके पास है, तो वे सीबीआई से साझा करें।
पूछा- क्या उच्च स्तर के अधिकारी करते हैं निगरानी
हाईकोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि यह मामला जन भावनाओं से जुड़ा है, इसलिए सीबीआई को यह बताने की जरूरत है कि उसे छानबीन में कुछ मिला भी है या नहीं। सीबीआई ने अतिरिक्त समय मांगते हुए कहा कि इस मामले की जांच सात नए बिंदुओं पर चल रही है।
जांचगत कारणों से इसे गोपनीय रखना पड़ रहा है। कोर्ट में सीबीआई की एसआईटी के प्रमुख एसएस गुरुम और डीएसपी सीमा पाहूजा पेश हुए। इन अधिकारियों की ओर से सीबीआई के अधिवक्ताओं ने कोर्ट से जांच के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग की। खंडपीठ ने पूछा कि इस मामले की छानबीन के बारे में क्या उच्च अधिकारियों समेत सीबीआई निदेशक को भी अवगत करवाया जाता है?
इस पर सीबीआई ने कहा कि इस केस की उच्च स्तर के अधिकारियों द्वारा निगरानी की जा रही है। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई की जांच पर कोई संदेह नहीं किया जा रहा है। ऐसा भी नहीं है कि सीबीआई ने कुछ नहीं किया, मगर यह मालूम होना जरूरी है कि इस मामले की छानबीन का नतीजा क्या निकला।
इनसे जांच नहीं होती तो एनआईए से करवाओ
गुड़िया के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ रही मदद सेवा ट्रस्ट की अध्यक्ष तनुजा थापटा ने कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच खंडपीठ से अनुरोध किया कि वह भी कुछ कहना चाहती हैं।
इस पर उन्हें बोलने की अनुमति दे दी गई। तनुजा ने खंडपीठ को मौखिक रूप से कहा कि गुड़िया दुराचार और हत्याकांड को हुए छह महीने हो गए हैं।
सीबीआई ने जिस तरह से इस मामले में दस लाख रुपये का इनाम रखा है, उससे तो साफ हो रहा है कि इनके हाथ कुछ नहीं आया है। अगर इन लोगों से कुछ नहीं हो पा रहा है तो इस प्रकरण की छानबीन एनआईए को क्यों नहीं दी जाती?
इस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल ने मौखिक तौर पर ही उन्हें कहा कि उनके पास कोई सुराग हो तो वे सीधे तौर पर सीबीआई को दें। वरना वह इसे प्रदेश उच्च न्यायालय को भी दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पब्लिक के पास भी अगर कुछ हो तो उसे भी सीबीआई को बताया जाए। सीबीआई को जांच में सहयोग किए जाने की जरूरत है।