गुड़िया रेप केस: CBI को मिली बड़ी सफलता, मुख्य संदिग्ध गिरफ्तार
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हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित गुड़िया हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआई की विशेष टीम ने शुक्रवार रात को मामले में पहली गिरफ्तारी की। गिरफ्तारी के बाद जांच टीम ने आरोपी को सीबीआई जज के सामने पेश किया, जहां से आरोपी को 25 अप्रैल तक की रिमांड पर भेज दिया गया। रिमांड मिलते ही जांच टीम आरोपी को लेकर दिल्ली रवाना हो गई।
माना जा रहा है कि मामले में जल्द और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। हिमाचल के इस बहुचर्चित मामले में 4 जुलाई 2017 को स्कूल से घर लौटते समय गायब हुई गुड़िया का क्षत-विक्षत शव 6 जुलाई को दांदी के जंगल में मिला था।
इसके बाद हिमाचल पुलिस की एसआईटी ने मामले में जांच कर 13 जुलाई को पांच आरोपियों की गिरफ्तारी कर ली, लेकिन गिरफ्तारी पर सवाल उठने पर तत्कालीन वीरभद्र सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश कर दी। हालांकि इस बीच एसआईटी ने पूछताछ जारी रखी, जिसमें 20 जुलाई को एक आरोपी सूरज की पुलिस लॉकअप में मौत हो गई थी।
नौ महीने तक खाली हाथ
इसके बाद भारी बवाल के बीच हिमाचल हाईकोर्ट ने सीबीआई को तत्काल केस अपने अधीन लेने के निर्देश दिए थे। आदेश के बाद सीबीआई ने 22 जुलाई को गुड़िया और सूरज की हत्या के मामले में दो अलग-अलग केस दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान सूरज की हत्या के आरोप में आईजी, एसपी और डीएसपी समेत कुल नौ पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी हुई। हालांकि गुड़िया हत्याकांड में खाली हाथ रहने वाली सीबीआई को खासी किरकिरी झेलनी पड़ रही थी।
नौ महीने तक खाली हाथ रहने पर 28 मार्च को हाईकोर्ट ने सीबीआई के निदेशक को तलब करने के आदेश जारी किए। इसके अगले ही दिन सीबीआई ने 25 अप्रैल तक मामले में गिरफ्तारी की बात कही थी। इसी के बाद से लगातार कयास लगाए जा रहे थे कि मामले में जल्द गिरफ्तारी हो सकती है।
गिरफ्तारी को रखा गोपनीय
करीब नौ माह की जांच के बाद की गई गिरफ्तारी को सीबीआई ने पूरी तरह गोपनीय रखा है। सीबीआई के प्रवक्ता आरके गौड़ ने मामले में एक व्यक्ति की गिरफ्तारी की तो पुष्टि की, लेकिन गिरफ्तारी का स्थान और गिरफ्तार आरोपी की पहचान बताने से इंकार किया है।
सूत्रों का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि मामले में जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। आशंका है कि अगर आरोपी के नाम का खुलासा किया तो अन्य आरोपी भूमिगत हो सकते हैं।
चरानियों पर थी सीबीआई की नजर
सीबीआई ने मामले की जांच के दौरान कोटखाई और आसपास के गांवों के सैकड़ों लोगों से पूछताछ की। बड़ी संख्या में लोगों के ब्लड सैंपल भी लिए गए। लंबी फोरेंसिक जांच के बाद भी सीबीआई को सफलता नहीं मिल रही थी।
इसी बीच जांच टीम को चरानियों की सूचना मिली। इसके बाद से ही टीम कोटखाई में मौजूद रहे चरानियों की तलाश में जुटी हुई थी।
गुड़िया मामले में टाइम लाइन
6 जुलाई 2017: कोटखाई के जंगल में गुड़िया का शव मिला, पुलिस ने दुराचार के बाद हत्या की आशंका जताई।
7 जुलाई : पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुराचार का खुलासा, कोटखाई में हुआ प्रदर्शन।
13 जुलाई : पुलिस की एसआईटी ने मामले में छह लोेगों को गिरफ्तार किया।
14 जुलाई : पुलिस जांच के विरोध में ठियोग थाने पर पथराव, सीबीआई जांच की संस्तुति।
22 जुलाई : सीबीआई ने दिल्ली में दर्ज की एफआईआर।
29 अगस्त: मामले में सीबीआई ने आईजी समेत आठ पुलिस वालों को गिरफ्तार किया।
25 नवंबर : गिरफ्तार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दायर की चार्जशीट।
29 मार्च 2018 : हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश कर 25 अप्रैल तक मामला सुलझाने का दावा।
विधानसभा चुनाव में बना था अहम मुद्दा
गुड़िया हत्याकांड पिछले साल काफी चर्चा में रहा और विधानसभा चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बन गया था। भले ही गुड़िया के हत्यारों को पकड़ने में सीबीआई सफल नहीं हो पा रही थी।
लेकिन उसने पुलिस के नौ अधिकारियों-कर्मचारियों को गुड़िया मामले के कथित आरोपी सूरज की हत्या के मामले में गिरफ्तारी कर हिमाचल पुलिस की जांच पर सवाल उठा दिए थे। इस गिरफ्तारी के बाद ही हिमाचल पुलिस की साख पर बट्टा लगा था।