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किशाऊ बांध विवाद सुलझा, हिमाचल की शर्तें मानी
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला/देहरादून
Updated Sun, 17 May 2015 10:49 AM IST
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हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर बनने वाले किशाऊ बांध को लेकर खड़ा हुआ विवाद खत्म हो गया है। प्रदेश की बड़ी शर्त को उत्तराखंड मानने को तैयार हो गया है।
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अब किशाऊ के डाउन स्ट्रीम में पहले से बने पांच पावर प्रोजेक्टों में उत्पादन बढ़ने की स्थिति में हिमाचल को भी उसका 50 फीसदी शेयर मिलेगा। शनिवार को देहरादून में दोनों ही राज्यों के मुख्य सचिव स्तर की वार्ता में इस पर सहमति बन गई है।
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किशाऊ बांध के डाउन स्ट्रीम में पहले से बने 470 मेगावाट के पांच पावर प्रोजेक्टों में हिमाचल को अभी तक 20 और 25 प्रतिशत शेयर मिल रहा है। प्रदेश की ओर से मांग की जा रही थी कि किशाऊ बनने के बाद उक्त पांचों प्रोजेक्ट से बिजली उत्पादन बढ़ेगा।
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ऐसे में जितना उत्पादन बढ़ता है, उसका 50 फीसदी शेयर हिमाचल को दिया जाए, इस पर उत्तराखंड तैयार नहीं था। इसकी वजह से यह प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ था। बुधवार की बैठक में इस मसले पर सहमति बनी है। बैठक में एमओयू का ड्रॉफ्ट भी तैयार किया गया।
अब ड्रॉफ्ट को दोनों ही राज्यों की कैबिनेट में ले जाया जाएगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत की उपस्थिति में एमओयू साइन होगा। एक माह के भीतर एमओयू की तिथि तय की जाएगी। बैठक में हिमाचल की ओर से मुख्यसचिव पी मित्रा और प्रधान सचिव ऊर्जा एसकेबीएस नेगी मौजूद थे। दोनों अधिकारी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत से भी मिले।
बनेगा ज्वाइंट वेंचर-किशाऊ बांध के लिए ज्वाइंट वेंचर (जीवी) बनाया जाएगा जिसका कार्यालय देहरादून में होगा। बांध उत्तराखंड में टौंस नदी पर बनाया जा रहा है। इसके बनने से हिमाचल का भी एक बड़ा क्षेत्र जलमग्न हो जाएगा। इसके दायरे में सिरमौर जिले के 100 से ज्यादा छोटे-बड़े गांव आ रहे हैं।
इससे 660 मेगावाट बिजली बनेगी, जिसका 50-50 फीसदी शेयर दोनों ही राज्यों को मिलेगा। जबकि इसका पानी देश के छह राज्यों को मिलना है। बांध का निर्माण 10 हजार करोड़ रुपये से किया जाना है। इसकी 90 फीसदी फंडिंग केंद्र करेगा।