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जेबीटी प्रशिक्षुओं दावा: उपचुनाव में दबाया नोटा, इस वजह से है नाराज
Wed, 03 Nov 2021 05:28 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 03 Nov 2021 05:28 PM IST
सार
जेबीटी डीएलएड छात्रों ने नोटा दबाकर सरकार का विरोध किया है। अपना विरोध दर्ज करवाने के लिए मोर्चा ने उपचुनावों में नोटा का विकल्प चुनने का दावा किया है। भर्ती प्रक्रिया में बीएड वालों को भी शामिल करने से जेबीटी डीएलएड संयुक्त मोर्चा नाराज है।
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नोटा का बटन (सांकेतिक )
विस्तार
नौकरी नहीं मिलने से नाराज हिमाचल प्रदेश के जेबीटी डीएलएड छात्रों ने नोटा दबाकर सरकार का विरोध किया है। भर्ती प्रक्रिया में बीएड वालों को भी शामिल करने से जेबीटी डीएलएड संयुक्त मोर्चा नाराज है। मोर्चा पदाधिकारियों ने 12 मई 2019 को हुई परीक्षा का परिणाम अभी नहीं निकलने पर नाराजगी जताई है। अपना विरोध दर्ज करवाने के लिए मोर्चा ने उपचुनावों में नोटा का विकल्प चुनने का दावा किया है। जेबीटी डीएलएड संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारी रवि नेगी, घनश्याम, मदन, नूरम चंद, रोहित, रमन, दिनेश, राकेश, नरेंद्र, पवन शर्मा, कुसुम और अनीता ने कहा कि एक भर्ती के दो नियम कैसे हो सकते हैं।
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जेबीटी संयुक्त मोर्चा के छात्र बार-बार सरकार से मिले, लेकिन हर आश्वासन ही मिला। जब मौजूदा आरएंडपी नियमों में बीएड की कोई जगह नहीं है तो सरकार अपने आरएंडपी नियमों को डिफेंड करने में इतना टाइम कैसे लगा सकती है। सरकार की तरफ से कोर्ट में ढीला डाला रवैया अपनाया गया। इसका खामियाजा जेबीटी डीएलएड छात्रों को भुगतना पड़ा। जेबीटी डीएलएड संयुक्त मोर्चा ने सरकार से 11 तारीख को इस केस की हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अपने पक्ष को मजबूती से रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार की इस नीति से 40 हजार छात्रों में भारी रोष है। सरकार का रवैया नहीं बदला तो वर्ष 2022 के चुनावों में भी नोटा का ही प्रयोग किया जाएगा।
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करुणामूलक आश्रितों ने सरकार को दी चेतावनी
हिमाचल करुणामूलक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि करुणामूलक परिवारों ने उपचुनावों में वोट से चोट कर सरकार को करारा जवाब दिया है। सरकार ने आश्रितों को अब भी नौकरियां नहीं दी तो वर्ष 2022 के चुनावों में भी इसके परिणाम भुगतने होंगे। अजय कुमार ने कहा कि अभी भी सरकार इन परिवारों की पीड़ा को समझे और करुणामूलक नौकरियां बहाल करे। करुणामूलक संघ 97 दिनों से शिमला में कालीबाड़ी मंदिर के समीप वर्षा शालिका में क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठा है। सरकार से कोई भी इनका हालचाल जानने नहीं आया है। नौकरी देने के मामलों पर अभी तक सरकार कोई अंतिम फैसला नही ले पाई है। सरकार के पास विभिन्न विभागों में 4500 से ज्यादा मामले हैं। प्रभावित परिवार करीब 15 साल से नौकरी का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई विभागों में कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने के बाद आश्रित परिवार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है।
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