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shimla: गेयटी में होगा जश्न-ए-अदब कल्चरल कारवां विरासत का आयोजन

Mon, 12 Dec 2022 11:18 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: शिमला ब्यूरो Updated Mon, 12 Dec 2022 11:18 PM IST
सार

प्रदेश में आजादी के 75वें वर्ष के उपलक्ष्य में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मनाया जा रहा है। जश्न-ए-अदब कल्चरल कारवां विरासत का आयोजन 10 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गोवा, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़ और श्रीनगर में किया जा रहा है।

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Jashn-e-Adab Cultural Caravan Heritage to be organized at Gaiety
गेयटी थियेटर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय, प्रदेश सरकार और भाषा एवं संस्कृति विभाग गेयटी थियेटर में 16 और 17 दिसंबर को जश्न-ए-अदब कल्चरल कारवां विरासत 2022 का आयोजन करवा रहे हैं। प्रदेश में आजादी के 75वें वर्ष के उपलक्ष्य में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मनाया जा रहा है। जश्न-ए-अदब कल्चरल कारवां विरासत का आयोजन 10 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गोवा, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़ और श्रीनगर में किया जा रहा है। दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कथक, गजल, हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन, कव्वाली, दास्तानगोई, नाटक, कवि सम्मेलन, मुशायरा और हिंदुस्तानी अदब पर चर्चा जैसे आयोजन होंगे।

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इस दौरान हिंदुस्तानी कला एवं साहित्य के जाने-माने कलाकार कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। इसमें रईस अनीस सबरी द्वारा कव्वाली, विधा लाल कथक प्रदर्शन, विद्या शाह गजल और शास्त्रीय गायन, फोजिया दास्तांगो और रितेश यादव द्वारा ‘दास्तान-ए-राम’ दास्तानगोई, जस्टिस शबीहु हसनैन शास्त्री और फरहात अहसास द्वारा ‘अदब ना हो तो’ पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा कवि सम्मेलन एवं मुशायरा में भारत के जाने माने कवि मंच पर अपनी रचनाओं की प्रस्तुति करेंगे। इसमें पद्मश्री प्रोफेसर अशोक चक्रधर (जाने-माने भारतीय कवि), मदन मोहन दानिश (कवि), खुशबीर सिंह शाद (कवि), कुंवर रणजीत चौहान (पुरस्कार विजेता- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात भारतीय कवि), क्वैसर खालिद (आईपीएस), आजम शकीरी (कवि), इरशाद कामिल और रंजन निगम (कवि) भाग लेंगे।
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देश की जड़ों में बसा है साहित्य : रणजीत
उर्दू कवि एवं संस्थापक कुंवर रणजीत चौहान ने जश्न-ए-अदब फाउंडेशन ने कल्चरल कारवां विरासत 2022 के बारे में बताया कि हिंदुस्तानी कला, संस्कृति और साहित्य हमेशा से देश की जड़ों में बसा है। खासतौर पर युवाओं में इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों के लिए विशेष उत्साह होता है। बताया कि कबीर, अमीर खुसरो, गालिब और मीरा बाई की रचनाएं आज भी उतनी ही तरोताजा हैं, जितनी उस समय थीं। पद्मश्री प्रोफेसर अशोक चक्रधर ने कहा कि जश्न-ए-अदब कल्चरल कारवां विरासत एक बेहतरीन आयोजन है जो हमारे देश की विभिन्न श्रेणियों को एक मंच पर लेकर आता है।

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