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Shimla News: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल का कठोर कारावास
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिमला विवेक शर्मा की अदालत ने सुनाया फैसला, पीड़िता को चार लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश
शादी का झांसा देकर किया था दुष्कर्म, पीड़िता ने अस्पताल में एक बच्ची को दिया था जन्म
बच्ची के डीएनए टेस्ट ने खोली पोल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट रेप/ पोक्सो) शिमला विवेक शर्मा की अदालत ने दोषी को पॉक्साे एक्ट की धारा 6 के तहत यह सजा सुनाई है। अदालत ने पीड़िता के मानसिक आघात को देखते हुए उन्हें 4 लाख रुपये की अतिरिक्त पुनर्वास मुआवजा राशि देने के आदेश भी दिए हैं। दुष्कर्म के बाद पीड़िता ने अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया था। इसके बाद पुलिस ने पीड़िता, दोषी और नवजात बच्ची के रक्त के नमूने राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एसएफएल) जुन्गा भेजे थे। फोरेंसिक रिपोर्ट से यह पूरी तरह साबित हो गया कि दोषी ही उस बच्ची का पिता है।
ट्रायल के दौरान डीएनए रिपोर्ट एक पुख्ता साक्ष्य साबित हुई जिसने दोषी के अपराध को साबित कर दिया। यह मामला वर्ष 2024 का है जब केवल 14 साल की नाबालिग पीड़िता अपनी चचेरी बहन के पास रहने आई थी। वहीं उसकी पहचान इसी भवन में रहने वाले दोषी विनोद कुमार से हुई। पीड़िता की बहन के गांव लौटने के बाद दोषी ने उसे शादी का झांसा दिया और बिना किसी रीति रिवाज के अपने कमरे में ले जाकर शादी का ढोंग रचाया। बाद में जब मकान मालिक ने सरकारी जमीन पर बना भवन ढहा दिया तो दोषी पीड़िता को पास ही की एक झुग्गी में ले गया। यहां उसने करीब पांच-छह महीने तक नाबालिग के साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाए जिसके बाद पीड़िता गर्भवती हो गई। दोषी को पीड़िता के नाबालिग होेने का पूरा पता था। उसने पीड़िता को धमकी दी थी कि यदि उसने किसी को अपनी असली उम्र बताई तो वह उसे जान से मार डालेगा। पीड़िता किसी तरह दोषी के चंगुल से भागकर अपनी मां के पास पहुंची और आपबीती सुनाई। मां की शिकायत पर आनी थाने में जीराे एफआईआर दर्ज की गई जिसे बाद में रोहड़ू पुलिस स्टेशन स्थानांतरित किया गया। यहां पुलिस ने जहां 21 जनवरी को मामला किया। पुलिस ने दोषी को गिरफ्तार कर लिया था। ट्रायल के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि दोनों ने सहमति से शादी की थी और दोषी महज 20 साल का युवा है इसलिए उसकी उम्र को देखते हुए नरमी बरती जाए। अदालत ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया था।
अदालत ने स्पष्ट किया कि घटना के वक्त पीड़िता महज 14 वर्ष की थी। पॉक्सो कानून के तहत किसी भी नाबालिग की सहमति का कानून की नजर में कोई मूल्य नहीं होता। अदालत ने कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों से समाज के हितों और अपराध की गंभीरता को देखते हुए किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। अदालत ने दोषी को पोक्साे एक्ट की धारा 6 के तहत 20 साल के कठोर कारावास और भारत दंड संहिता की धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत 2 साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
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शादी का झांसा देकर किया था दुष्कर्म, पीड़िता ने अस्पताल में एक बच्ची को दिया था जन्म
बच्ची के डीएनए टेस्ट ने खोली पोल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट रेप/ पोक्सो) शिमला विवेक शर्मा की अदालत ने दोषी को पॉक्साे एक्ट की धारा 6 के तहत यह सजा सुनाई है। अदालत ने पीड़िता के मानसिक आघात को देखते हुए उन्हें 4 लाख रुपये की अतिरिक्त पुनर्वास मुआवजा राशि देने के आदेश भी दिए हैं। दुष्कर्म के बाद पीड़िता ने अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया था। इसके बाद पुलिस ने पीड़िता, दोषी और नवजात बच्ची के रक्त के नमूने राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एसएफएल) जुन्गा भेजे थे। फोरेंसिक रिपोर्ट से यह पूरी तरह साबित हो गया कि दोषी ही उस बच्ची का पिता है।
ट्रायल के दौरान डीएनए रिपोर्ट एक पुख्ता साक्ष्य साबित हुई जिसने दोषी के अपराध को साबित कर दिया। यह मामला वर्ष 2024 का है जब केवल 14 साल की नाबालिग पीड़िता अपनी चचेरी बहन के पास रहने आई थी। वहीं उसकी पहचान इसी भवन में रहने वाले दोषी विनोद कुमार से हुई। पीड़िता की बहन के गांव लौटने के बाद दोषी ने उसे शादी का झांसा दिया और बिना किसी रीति रिवाज के अपने कमरे में ले जाकर शादी का ढोंग रचाया। बाद में जब मकान मालिक ने सरकारी जमीन पर बना भवन ढहा दिया तो दोषी पीड़िता को पास ही की एक झुग्गी में ले गया। यहां उसने करीब पांच-छह महीने तक नाबालिग के साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाए जिसके बाद पीड़िता गर्भवती हो गई। दोषी को पीड़िता के नाबालिग होेने का पूरा पता था। उसने पीड़िता को धमकी दी थी कि यदि उसने किसी को अपनी असली उम्र बताई तो वह उसे जान से मार डालेगा। पीड़िता किसी तरह दोषी के चंगुल से भागकर अपनी मां के पास पहुंची और आपबीती सुनाई। मां की शिकायत पर आनी थाने में जीराे एफआईआर दर्ज की गई जिसे बाद में रोहड़ू पुलिस स्टेशन स्थानांतरित किया गया। यहां पुलिस ने जहां 21 जनवरी को मामला किया। पुलिस ने दोषी को गिरफ्तार कर लिया था। ट्रायल के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि दोनों ने सहमति से शादी की थी और दोषी महज 20 साल का युवा है इसलिए उसकी उम्र को देखते हुए नरमी बरती जाए। अदालत ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया था।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि घटना के वक्त पीड़िता महज 14 वर्ष की थी। पॉक्सो कानून के तहत किसी भी नाबालिग की सहमति का कानून की नजर में कोई मूल्य नहीं होता। अदालत ने कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों से समाज के हितों और अपराध की गंभीरता को देखते हुए किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। अदालत ने दोषी को पोक्साे एक्ट की धारा 6 के तहत 20 साल के कठोर कारावास और भारत दंड संहिता की धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत 2 साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
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