कुल्लू दशहरा: सबसे पहली मणिकर्ण में रखी थी भगवान रघुनाथ की प्रतिमा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुल्लू/खराहल Updated Sat, 20 Oct 2018 01:13 PM IST
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अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में हर साल जिले से सैकड़ों देवी-देवता आते हैं। ढालपुर मैदान में हर वर्ष देव परंपरा के साथ दशहरा उत्सव मनाया जाता है। बताया जाता है कि भगवान रघुनाथ की प्रतिमा को सबसे पहले धार्मिक नगरी मणिकर्ण में रखा गया था। 1651 में भगवान रघुनाथ, सीता और हनुमान की मूर्तियों को अयोध्या से दामोदर दास लाए थे। इन्हें राजा के आदेश पर धार्मिक तीर्थ स्थल मणिकर्ण में रखा गया था।
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कहा जाता है कि दशहरा उत्सव का पहला आयोजन मणिकर्ण में हुआ था। वर्ष 1660 में तत्कालीन राजा जगत सिंह ने मूर्तियों को कुल्लू के सुल्तानपुर में रघुनाथ की नगरी में स्थापित किया था। अंतरराष्ट्रीय दशहरे का सफर 1970 में आरंभ हुआ था। वर्ष 1966 तक इसे राज्य स्तर का दर्जा था। सत्तर के दशक में अंतरराष्ट्रीय स्तर का दर्जा देने की घोषणा हुई, लेकिन लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय उत्सव के मानक पर खरा नहीं उतरने से 47 साल बाद यानी 2017 में इसे अंतरराष्ट्रीय उत्सव का दर्जा मिला।
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दशहरा में 1971 में हुआ था गोलीकांड

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