फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   insurance claim is not givining to Apple grower in himachal, gadbadjhala in Banks and insurance companies

सेब बागवानों ने बीमा करवा लिया, पैसे देने की बारी आई तो खड़े कर लिए हाथ

Thu, 26 Aug 2021 02:12 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 26 Aug 2021 02:12 AM IST
सार

कंपनियां प्रत्येक कर्जधारक बागवान के खाते से हजारों रुपये फसल बीमा के नाम से कटवा रही हैं। खाते से जब पैसा कट जाता है तो बैंक से मालूम करने पर ये फसल बीमा का प्रीमियम कटा है।

विज्ञापन
insurance claim is not givining to Apple grower in himachal, gadbadjhala in Banks and insurance companies
फसल बीमा(फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सेब बागवानों ने बीमा तो करवा लिया, मगर जब पैसे देने की बारी आई तो हाथ खडे़ कर दिए। हिमाचल प्रदेश में किसानों के कर्ज के खातों पर बैंकों और बीमा कंपनियों का गड़बड़झाला चल रहा है। उनके कर्ज के खातों से प्रीमियम काटकर कहां जा रहा है, यह किसान-बागवान नहीं जानते हैं। कंपनियां प्रत्येक कर्जधारक बागवान के खाते से हजारों रुपये फसल बीमा के नाम से कटवा रही हैं। खाते से जब पैसा कट जाता है तो बैंक से मालूम करने पर ये फसल बीमा का प्रीमियम कटा है। जब दावे किए जाते हैं तो कंपनियां कह रही हैं कि ओलावृष्टि इसमें कवर नहीं है, इसके लिए टॉप अप लिया जाए। टॉप अप कब लें, यह बागवानों की समझ से परे है।  हिमाचल प्रदेश में हाल ही में भारी बर्फबारी और ओलावृष्टि से सेब और अन्य फसलों को भारी नुकसान हुआ है। मगर बैंकों और बीमा कंपनियों की ओर से बताया जा रहा है कि ओलावृष्टि इसमें कवर नहीं है। इस मुद्दे को सेब सीजन से पहले स्वर्गीय बागवानी मंत्री नरेंद्र बरागटा भी उठा चुके थे, लेकिन बागवानों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा। सेब बागवानों ने तो इस संबंध में सीबीआई जांच तक की मांग की थी। 

विज्ञापन

   
दवाओं पर सब्सिडी की योजना बदलने से भी खफा हैं बागवान 
हाल में सरकार ने बागवानी विस्तार केंद्रों के माध्यम से स्प्रे की दवाइयों की बिक्री रोकने और खुले बाजार में सीमित दवाइयां देने का निर्णय लिया है। अब बागवानों को उद्यान विभाग सस्ती सब्सिडीयुक्त दवाएं देने के बजाय एक हेक्टेयर तक फसल के लिए एक साल में अधिकतम आठ हजार रुपये तक दवाएं खरीद कर ही उपदान देने का दावा कर रहा है। दवाओं के अधिकतम चार हजार रुपये उनके खाते में लौटा देने की बात की। इससे कम दवा खरीद पर पचास फीसदी उपदान मिलेगा, जबकि कई ब्लॉकों में एंटी हेलनेट की सब्सिडी भी कई साल से नहीं दी गई है। इससे भी सेब बागवान खफा है कि दवा सब्सिडी के मामले में भी आवेदन लंबित हैं। पहले इस तरह का झंझट नहीं था। वहीं, बागवानी विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि यह व्यवस्था केंद्र से ही हुई है। इस बारे में देहांत से पहले पूर्व बागवानी मंत्री नरेंद्र बरागटा ने तो सीएम जयराम ठाकुर को चिट्ठी तक लिखी थी। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed