तीन तूफान भी नहीं डिगा सके टीम तारिणी के कदम, बयान की 254 दिनों की यात्रा
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254 दिनों में नौका में विपरीत परिस्थितियों में कड़ी मेहनत कर समुद्र के रास्ते विश्व परिक्रमा करने वाली भारतीय नौसेना की छह महिला अधिकारियों ने कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। हौसला नहीं डगमगाने दिया और लगातार आगे बढ़ती रहीं। तूफान, बारिश या फिर बर्फबारी, कारवां नहीं रुका-लगातार आगे बढ़ता गया। समुद्र का एवरेस्ट कैप हॉर्न भी महिला अधिकारियों के साहस को नहीं डगमगा पाया।
बीते सोमवार को गोवा में पहुंचने के बाद मंगलवार को हवाई मार्ग से महिला अधिकारी दिल्ली पहुंचीं। यहां बुधवार को महिला नेवी अधिकारियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मानित करेंगे। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला के मौहल क्षेत्र से संबंध रखने वाली लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जम्वाल इस टीम का हिस्सा रहीं। लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जम्वाल ने अमर उजाला से खास बातचीत की। पेश हैं कुछ अंश:
1. नाव पर सागर परिक्रमा के दौरान सबसे भयावह क्या लगा और क्यों?
तीन तूफानों का सामना करना बेहद खतरनाक रहा। केप हॉर्न से पहले तेज हवाएं चल रही थीं। फॉकलैंड में दूसरा तूफान मिला। इससे एक सेल खुल गया था। पूरी रात सेल को बंद करने में लग गया। मॉरिशस के पास स्टीयरिंग सिस्टम खराब हो गया। यहां तूफान आने पर बोट की लोकेशन चेंज करनी पड़ी।
2. सागर परिक्रमा में आप किन दिक्कतों से गुजरे?
वाटर मेकर खराब होने से दिक्कतें हुईं। इस पर ड्रिंकिंग वाटर कम कर दिया। बारिश के पानी को स्टोर कर उपयोग में लाया। करीब तीन साल ट्रेनिंग खतरनाक बिंदुओं से निपटने के लिए ही हुई थी। जमाव बिंदु पर सेलिंग करने से हाथ तक जमना, ओस गिरना, तेज हवाओं के बीच सेल करना बेहद जोखिम भरा रहा। मौसम के चलते लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका, एश्वर्या और मुझे फ्रास्टबाइट बीमारी हो गई थी।
महीनों पानी में गुजारना कैसा अनुभव रहा? किस तरह दिन-रात गुजारते थे?
3. महीनों पानी में गुजारना कैसा अनुभव रहा? किस तरह दिन-रात गुजारते थे?
24 घंटे में से चार घंटे वॉच करनी होती थी। कई बार छह से 12 घंटे वाच करना पड़ता था। अमूमन दिन वाच के अलावा अन्य कार्यों में निकल जाता था। समय मिलने पर स्पेशल कुक, मूवी देखकर समय गुजारते थे।
4. घर वापसी कब होगी और मिशन सफल होने पर जश्न कहां और कैसे मनाया जाएगा?
मीडिया के साथ लगातार अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। जून के आखिरी तक कुल्लू के मौहल स्थित अपने घर पहुंचने की उम्मीद है। परिजनों संग जश्न होगा। स्कूल व दोस्तों से भी मुलाकात होगी।
5. अब आपकी अगली योजना क्या रहेगी?
बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने जा रहे हैं। फिर राष्ट्रपति से भी मिलने की योजना है। अगली योजना पर अभी निर्णय नहीं लिया है।
6. क्या आप दोबारा नाव में सागर परिक्रमा पर जाना चाहोगे?
बोट के माध्यम से सागर परिक्रमा करना उपलब्धि है। अगर दोबारा मौका मिला तो अवश्य विचार करूंगी। 17 मीटर लंबी बोट में सफर रोमांच और जोखिमों से भरा रहा। यह कभी नहीं भूल पाएगा।
7. सागर परिक्रमा के अच्छे अनुभव?
सागर परिक्रमा के दौरान बहुत कुछ सीखा है। अलग-अलग संस्कृति, इंडियन रूट, वाइल्ड लाइफ देखने को मौका मिला है। बोट में रहते हुए घर पहुंचने पर खुशी होने का एहसास था। लेकिन बोट के गोवा पहुंचने पर खुशी के साथ गम भी था कि अब समुद्र के बीच शांति और अन्य चीजें खत्म हो गई है।
8. परिजनों से किस तरह संपर्क होता था?
शुरुआती दौर में परिजनों से ईमेल से संपर्क करते थे। बोट में वाईफाई था। इससे 100 एमबी डाटा दिन में खर्च किया जा सकता है। व्हाट्सएप कॉलिंग के माध्यम से परिजनों को संपर्क किया जाता था।
9. नाव में आपकी क्या भूमिका रही, दिनचर्या कैसे रहती थी?
नाव छोटी और काम बहुत अधिक रहते थे। सभी हर काम में एक्सपर्ट थे और समय को देखते सभी काम करते थे।
10. किस तरह के मौसम में आपने नाव में सवार होकर सागर परिक्रमा की?
दिन-रात, बारिश हो या तूफान, बर्फबारी में भी बोट सेल की। न्यूनतम माइनस सात डिग्री और अधिकतम 40 डिग्री ,जहां हवा नाममात्र भी न हो, तापमान में बोट चलाई। विपरीत परिस्थितियों के बीच भी सेलिंग जारी रखी।