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Shimla News: ब्यूल-शहतूत के पौधे लगााने से जंगलों में घटेगी आग की घटनाएं
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देवदार और चील के पौधे फैलाते हैं आग
बान, ब्यूल और शहतूत लगाना लाभदायक : संदीप
हर्षित शर्मा
शिमला। सर्दियों और गर्मियों के मौसम में आग से दहकने वाले जंगलों को बचाने के लिए जंगलों में ब्यूल, शहतूत और बान के पेड़ लगाए जाने चाहिए।
हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान पंथाघाटी के वानिकी वैज्ञानिक संदीप शर्मा ने बताया कि देवदार और चील के पेड़ों के पत्ते जंगलों की तलहट्टी को पूरी तरह ढक देते हैं। देवदार के पेड़ किसी और प्रजाति को अपने आस-पास नहीं उगने देते। इस कारण अक्सर चील और देवदार के जंगल सूखे रहते हैं। इससे जंगलों में आग तुरंत फैल जाती है। इनकी जगह ब्यूल, बान और शहतूत के पौधे लगाने से जंगलों की आग को कम किया जा सकता है। यह प्रजातियां देवदार के मुकाबले कम आक्रामक हैं। प्रदेश में मौजूदा वन्य प्रजातियों के जंगलों में चील और देवदार के सबसे ज्यादा 17 प्रतिशत जंगल आग के लिहाज से संवेदनशील हैं। इनमें से सबसे ज्यादा संवेदनशील जंगल शिमला के आसपास हैं।
भूमि कटाव भी होगा कम
ब्यूल और बान से जंगल हरे-भरे रहते हैं और आग एकदम नहीं फैलती। इन पौधों के घास का इस्तेमाल जानवरों के चारे के रूप में भी किया जा सकता है। शहतूत जंगलों में भूजल की मात्रा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते है। लंबी जड़े होने से यह प्रजातियां मिट्टी को पकड़ कर रखती हैं जिससे कटाव कम होता है। वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के जंगलों में अब तक आग के 1000 से अधिक मामले आ चुके हैं। आग से 8000 हेक्टेयर से ज्यादा इलाका प्रभावित हुआ है।
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बान, ब्यूल और शहतूत लगाना लाभदायक : संदीप
हर्षित शर्मा
शिमला। सर्दियों और गर्मियों के मौसम में आग से दहकने वाले जंगलों को बचाने के लिए जंगलों में ब्यूल, शहतूत और बान के पेड़ लगाए जाने चाहिए।
हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान पंथाघाटी के वानिकी वैज्ञानिक संदीप शर्मा ने बताया कि देवदार और चील के पेड़ों के पत्ते जंगलों की तलहट्टी को पूरी तरह ढक देते हैं। देवदार के पेड़ किसी और प्रजाति को अपने आस-पास नहीं उगने देते। इस कारण अक्सर चील और देवदार के जंगल सूखे रहते हैं। इससे जंगलों में आग तुरंत फैल जाती है। इनकी जगह ब्यूल, बान और शहतूत के पौधे लगाने से जंगलों की आग को कम किया जा सकता है। यह प्रजातियां देवदार के मुकाबले कम आक्रामक हैं। प्रदेश में मौजूदा वन्य प्रजातियों के जंगलों में चील और देवदार के सबसे ज्यादा 17 प्रतिशत जंगल आग के लिहाज से संवेदनशील हैं। इनमें से सबसे ज्यादा संवेदनशील जंगल शिमला के आसपास हैं।
भूमि कटाव भी होगा कम
ब्यूल और बान से जंगल हरे-भरे रहते हैं और आग एकदम नहीं फैलती। इन पौधों के घास का इस्तेमाल जानवरों के चारे के रूप में भी किया जा सकता है। शहतूत जंगलों में भूजल की मात्रा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते है। लंबी जड़े होने से यह प्रजातियां मिट्टी को पकड़ कर रखती हैं जिससे कटाव कम होता है। वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के जंगलों में अब तक आग के 1000 से अधिक मामले आ चुके हैं। आग से 8000 हेक्टेयर से ज्यादा इलाका प्रभावित हुआ है।
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