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Shimla News: केएनएच और डीडीयू अस्पताल में शिशुओं के आधार कार्ड बनना शुरू
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अस्पतालों में 48 दिन से बंद था कार्ड बनाने का काम
0 से 5 साल तक के बच्चों के बनाए जाते हैं आधार कार्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। प्रदेश के सबसे बड़े मातृ एवं शिशु अस्पताल कमला नेहरू (केएनएच) और जोनल अस्पताल डीडीयू में शिशुओं के आधार कार्ड बनना शुरू हो गए हैं। इस सुविधा को फिर से शुरू करवाने में 48 दिन लग गए।
दोनों प्रमुख अस्पतालों में मंगलवार दोपहर बाद साइट चली। शाम तक दोनों अस्पतालों में 0 से 5 साल तक के शिशुओं के आधार कार्ड बनाए गए। केएनएच और डीडीयू अस्पताल में रोजाना 25 से 30 महिलाओं की डिलीवरी होती है। डिलीवरी के बाद ही अस्पताल में शिशुओं के आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है लेकिन 48 दिन से साइट न चलने के कारण अभिभावक परेशान थे। अस्पताल में दूसरे जिलों से आने वाले अभिभावकों को अधिक परेशानी हो रही थी। अब साइट चलने के बाद अब अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। केएनएच के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि साइट को ठीक कर दिया है। अब पहले की तरह बच्चों के आधार कार्ड अस्पताल में बनना शुरू हो गए हैं।
इस तरह होता है आधार लिंक्ड बर्थ पंजीकरण
अस्पताल में नवजात शिशुओं के पैदा होने के बाद ही आधार लिंक्ड बर्थ पंजीकरण होता है। इसमें शिशु के आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसका अलग साॅफ्टवेयर है। सबसे पहले बायोमीट्रिक मशीन के जरिये शिशु के माता और पिता के फिंगर प्रिंट लेकर आधार कार्ड की वेरिफिकेशन होती है। इसके बाद शिशु के जन्म का पंजीकरण नंबर डाला जाता है। सॉफ्टवेयर में जानकारी के बाद शिशु की फोटो अपलोड होती है। इसके बाद अभिभावकों को शिशु के आधार कार्ड बनाने का मैसेज आता है। इसके बाद 15 दिन में आधारकार्ड बनकर शिशु के घर पहुंच जाता है जोकि पांच साल तक मान्य होता है।
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0 से 5 साल तक के बच्चों के बनाए जाते हैं आधार कार्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। प्रदेश के सबसे बड़े मातृ एवं शिशु अस्पताल कमला नेहरू (केएनएच) और जोनल अस्पताल डीडीयू में शिशुओं के आधार कार्ड बनना शुरू हो गए हैं। इस सुविधा को फिर से शुरू करवाने में 48 दिन लग गए।
दोनों प्रमुख अस्पतालों में मंगलवार दोपहर बाद साइट चली। शाम तक दोनों अस्पतालों में 0 से 5 साल तक के शिशुओं के आधार कार्ड बनाए गए। केएनएच और डीडीयू अस्पताल में रोजाना 25 से 30 महिलाओं की डिलीवरी होती है। डिलीवरी के बाद ही अस्पताल में शिशुओं के आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है लेकिन 48 दिन से साइट न चलने के कारण अभिभावक परेशान थे। अस्पताल में दूसरे जिलों से आने वाले अभिभावकों को अधिक परेशानी हो रही थी। अब साइट चलने के बाद अब अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। केएनएच के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि साइट को ठीक कर दिया है। अब पहले की तरह बच्चों के आधार कार्ड अस्पताल में बनना शुरू हो गए हैं।
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इस तरह होता है आधार लिंक्ड बर्थ पंजीकरण
अस्पताल में नवजात शिशुओं के पैदा होने के बाद ही आधार लिंक्ड बर्थ पंजीकरण होता है। इसमें शिशु के आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसका अलग साॅफ्टवेयर है। सबसे पहले बायोमीट्रिक मशीन के जरिये शिशु के माता और पिता के फिंगर प्रिंट लेकर आधार कार्ड की वेरिफिकेशन होती है। इसके बाद शिशु के जन्म का पंजीकरण नंबर डाला जाता है। सॉफ्टवेयर में जानकारी के बाद शिशु की फोटो अपलोड होती है। इसके बाद अभिभावकों को शिशु के आधार कार्ड बनाने का मैसेज आता है। इसके बाद 15 दिन में आधारकार्ड बनकर शिशु के घर पहुंच जाता है जोकि पांच साल तक मान्य होता है।
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