छह रुपये की इस टैबलेट में छिपा जीका वायरस का इलाज
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जीका वायरस के इलाज को लेकर आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने बड़ा दावा किया है। मलेरिया की महज छह रुपये की हाइड्रॉक्सीक्लोराक्वीन गोली में जानलेवा जीका वायरस का इलाज छिपा है।भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के शोधकर्ताओं ने इसका दावा किया है।
सेंट लुईस अमेरिका स्थित वाशिंगटन और तमिलनाडु के अलगप्पा विवि के शोधकर्ताओं ने मिलकर जीका वायरस के उस लक्षित वायरल प्रोटीन की पहचान की, जिस पर मलेरिया की दवा असर करती है। आईआईटी मंडी में बायोटेक्नोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. रजनीश गिरि ने इसकी पुष्टि की है।
मार्केट में महज इतने रुपये में उपलब्ध है दवा
प्रो. रजनीश गिरि ने कहा कि वाशिंगटन विवि की प्रो. इंदिरा मैसूरकर के अतिरिक्त तमिलनाडु की अलगप्पा यूनिवर्सिटी के प्रो. संजीव कुमार के सहयोग से यह शोध अमेरिकन केमिकल सोसायटी में सीएस ओमेगा जर्नल में पब्लिश हुआ।
गौरतलब है कि मलेरिया की हाइड्रॉक्सीक्लोराक्वीन 200 एमजी का पत्ता मार्केट में महज नब्बे रुपये में उपलब्ध है। शोध के दौरान जीका वायरस को रोकने के लिए प्रोटीन नामक एक महत्वपूर्ण इंजाइम को निशाना बनाया गया। यह इंजाइम वायरस को जीवित रखता है। मलेरिया की दवा से इस इंजाइम का असर कम हुआ।
10 लाख से अधिक लोग जीका वायरस की चपेट में
शोधकर्ताओं की मानें तो दुनिया में दस लाख से अधिक लोग जीका वायरस से प्रभावित हैं। गर्भवती महिलाओं पर यह अधिक असर करता है और जच्चा-बच्चा के लिए जानलेवा होता है।
यह वायरस खास किस्म के फ्लैवीवायरस जींस के मच्छर से फैलता है। इसके जींस में डेंगू के वायरस, येलो फीवर वायरस और जापानी इनसेफ्लाइटिस के वायरस शामिल हैं। तेज बुखार, सिरदर्द, सुस्ती, आंखों में लाली इसके लक्षण हैं।
ऐसे शुरू हुआ शोध
शोधकर्ताओं के अनुसार सेंट लुईस अमेरिका स्थित वाशिंगटन विवि की प्रो. इंदिरा मैसूरकर की खोज से यह सामने आया कि मलेरिया की प्रचलित दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन जीका वायरस के संक्रमण को कम करती है।
खासकर किसी मां से उसके गर्भ में पल रहे बच्चों को यह वायरस प्रभावित नहीं करेगा। इसी निष्कर्ष पर काम करते हुए प्रो. गिरि की प्रयोगशाला ने उस लक्षित वायरल प्रोटीन की पहचान की है, जिस पर एचसीक्यू असर करता है।