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शहर में परिवहन सेवा बढ़ी, राहत नहीं मिली
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वर्ष 2002 में चलती थीं 90 बसें, अब 340 चलने के बाद भी हो रही ओवरलोडिंग
बाहरी क्षेत्रों में बस सेवा का एचआरटीसी पर दारोमदार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला में बीते 20 वर्षों में बसों की संख्या दोगुना से भी अधिक हो गई है, लेकिन अभी भी शहर के साथ लगते इलाकों में लोगों को बसों की किल्लत से परेशान होना पड़ता है। 2002 में शिमला शहर में महज 90 एचआरटीसी और प्राइवेट बसों का संचालन होता था और मौजूदा समय में शहर में बसों का आंकड़ा 340 से अधिक हो गया है।
बसों की संख्या बढ़ने के बावजूद सुबह और शाम के समय बसों में भारी ओवरलोडिंग रहती है। शहर के बाहरी क्षेत्रों से शहर आने के लिए अभी भी लोगों को बसों की किल्लत झेलनी पड़ रही है। साल 2007 में शहर के साथ लगते इलाकों को नगर निगम में शामिल किया गया जिसके बाद शहर का आउटर रिंग रोड, चक्कर, टुटू मज्याठ, कच्ची घाटी, मिनी कुफ्टाधार, लोअर भराड़ी शहर के साथ जुड़ गया। इन इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों को आज भी पर्याप्त परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं है। शहर के बाहरी क्षेत्रों में परिवहन सेवा का पूरा दारोमदार एचआरटीसी पर है, अधिकतर प्राइवेट बसें मुख्य शहर में ही संचालित हो रही है।
आईएसबीटी बनने के बाद
बाईपास पर बढ़ी बस सेवा
2012 में टुटीकंडी आईएसबीटी बनने के बाद आउटर रिंग रोड (बाईपास) पर बसों की आवाजाही में बढ़ोतरी हुई। टुटीकंडी क्रॉसिंग से लेकर फागली, लालपानी, कनलोग खलीनी रुट पर बसों का संचालन बढ़ाया गया।
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36 संपर्क मार्गों पर दौड़ी बसें, फिर भी राहत नहीं
2010 से 2018 के बीच राजधानी शिमला के साथ लगते 36 नए लिंक रोड (संपर्क सड़कों) पर एचआरटीसी ने बस सेवा शुरू की। इनमें पटगेहर, चेली, केल्टी बरमू, क्यार कोटी, लोअर भोंट और रामनगरी सहित अन्य रूट रूटो पर बसें शुरू हुई, लेकिन यह बसें सुबह और शाम के समय ही संचालित हो रही हैं। दिन के समय बस सुविधा का अभाव है।
शहर में ऐसा बढ़ा एचआरटीसी का बेड़ा
2008-09 में शिमला लोकल डिपो के पास 100 के करीब बसे थीं। 2002 में शहर को जेएनएनयूआरएम-1 के तहत 75 लाल बसें मिलीं। साल 2015 में जेएनएनयूआरएम-2 के तहत 50 नीली बसों की सौगात शहर को मिली। 2019-20 में शहर को 30 बड़ी और 20 छोटी इलेक्ट्रिक बसों की खेप मिली। साल 2011 से 2013 के बीच एचआरटीसी ने शहर में 33 रूटों पर राइड विद प्राइड नाम से टैक्सी सेवा शुरू की। मौजूदा समय में शहर में एचआरटीसी की करीब 235 और निजी बस ऑपरेटरों की 104 बसें संचालित हो रही हैं।
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बाहरी क्षेत्रों में बस सेवा का एचआरटीसी पर दारोमदार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला में बीते 20 वर्षों में बसों की संख्या दोगुना से भी अधिक हो गई है, लेकिन अभी भी शहर के साथ लगते इलाकों में लोगों को बसों की किल्लत से परेशान होना पड़ता है। 2002 में शिमला शहर में महज 90 एचआरटीसी और प्राइवेट बसों का संचालन होता था और मौजूदा समय में शहर में बसों का आंकड़ा 340 से अधिक हो गया है।
बसों की संख्या बढ़ने के बावजूद सुबह और शाम के समय बसों में भारी ओवरलोडिंग रहती है। शहर के बाहरी क्षेत्रों से शहर आने के लिए अभी भी लोगों को बसों की किल्लत झेलनी पड़ रही है। साल 2007 में शहर के साथ लगते इलाकों को नगर निगम में शामिल किया गया जिसके बाद शहर का आउटर रिंग रोड, चक्कर, टुटू मज्याठ, कच्ची घाटी, मिनी कुफ्टाधार, लोअर भराड़ी शहर के साथ जुड़ गया। इन इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों को आज भी पर्याप्त परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं है। शहर के बाहरी क्षेत्रों में परिवहन सेवा का पूरा दारोमदार एचआरटीसी पर है, अधिकतर प्राइवेट बसें मुख्य शहर में ही संचालित हो रही है।
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आईएसबीटी बनने के बाद
बाईपास पर बढ़ी बस सेवा
2012 में टुटीकंडी आईएसबीटी बनने के बाद आउटर रिंग रोड (बाईपास) पर बसों की आवाजाही में बढ़ोतरी हुई। टुटीकंडी क्रॉसिंग से लेकर फागली, लालपानी, कनलोग खलीनी रुट पर बसों का संचालन बढ़ाया गया।
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36 संपर्क मार्गों पर दौड़ी बसें, फिर भी राहत नहीं
2010 से 2018 के बीच राजधानी शिमला के साथ लगते 36 नए लिंक रोड (संपर्क सड़कों) पर एचआरटीसी ने बस सेवा शुरू की। इनमें पटगेहर, चेली, केल्टी बरमू, क्यार कोटी, लोअर भोंट और रामनगरी सहित अन्य रूट रूटो पर बसें शुरू हुई, लेकिन यह बसें सुबह और शाम के समय ही संचालित हो रही हैं। दिन के समय बस सुविधा का अभाव है।
शहर में ऐसा बढ़ा एचआरटीसी का बेड़ा
2008-09 में शिमला लोकल डिपो के पास 100 के करीब बसे थीं। 2002 में शहर को जेएनएनयूआरएम-1 के तहत 75 लाल बसें मिलीं। साल 2015 में जेएनएनयूआरएम-2 के तहत 50 नीली बसों की सौगात शहर को मिली। 2019-20 में शहर को 30 बड़ी और 20 छोटी इलेक्ट्रिक बसों की खेप मिली। साल 2011 से 2013 के बीच एचआरटीसी ने शहर में 33 रूटों पर राइड विद प्राइड नाम से टैक्सी सेवा शुरू की। मौजूदा समय में शहर में एचआरटीसी की करीब 235 और निजी बस ऑपरेटरों की 104 बसें संचालित हो रही हैं।