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हिमाचल: मंडी और बिलासपुर सीधे तत्तापानी से जुड़ेंगे, हरनोड़ा पुल के दोनों सिरे जुड़े; इन गांवों को मिलेगा लाभ
Sun, 13 Sep 2026 11:12 AM IST
Ankesh Dogra
देवेंद्र गुप्ता, सुंदरनगर (मंडी)।
देवेंद्र गुप्ता, सुंदरनगर (मंडी)।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 13 Sep 2026 11:12 AM IST
सार
सुंदरनगर के सलापड़-तत्तापानी मार्ग पर सतलुज नदी के ऊपर बन रहे हरनोड़ा पुल के दोनों सिरे नौ सितंबर को जुड़ गए हैं। करीब 18 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 156 मीटर लंबे पुल के तैयार होने से मंडी और बिलासपुर के बीच सीधी कनेक्टिविटी होगी। रामपुर और किन्नौर जाने वाले लोगों को शिमला-सोलन होकर लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। लोक निर्माण विभाग ने नवंबर तक पुल का लोकार्पण करने का लक्ष्य रखा है।
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हरनोड़ा पुल के दोनों सिरे मिल गए हैं।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
मंडी से बिलासपुर होते हुए ऊपरी हिमाचल और चीन सीमा तक पहुंचने का रास्ता अब और सुगम होने वाला है। सतलुज नदी पर निर्माणाधीन हरनोड़ा पुल के दोनों सिरे आपस में जुड़ गए हैं। इससे सुंदरनगर की सलापड़-तत्तापानी सड़क सीधे बिलासपुर से जुड़ जाएगी। पुल के तैयार होने के बाद रामपुर और किन्नौर जाने वाले लोगों को शिमला-सोलन होकर लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
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करीब 18 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 156 मीटर लंबे हरनोड़ा पुल के दोनों सिरे नौ सितंबर को जुड़ चुके हैं। इसके बाद पुल का शेष निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने अक्तूबर-नवंबर तक इसे आम जनता के लिए खोलने का लक्ष्य रखा है। पुल के तैयार होने से मंडी और बिलासपुर के बीच आवागमन आसान होगा और सलापड़-तत्तापानी मार्ग को भी नई कनेक्टिविटी मिलेगी।
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14 साल की कानूनी लड़ाई के बाद निर्माण में आई तेजी
हरनोड़ा पुल के निर्माण के लिए स्थानीय निवासी देशराज ने करीब 14 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में बीबीएमबी के साथ कानूनी लड़ाई शुरू करने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया। वर्ष 2016 में बीबीएमबी ने पुल निर्माण के लिए 18 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया।
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वर्ष 2017 में चंडीगढ़ की एक कंपनी को निर्माण कार्य सौंपा गया, लेकिन वर्ष 2023 तक महज 20 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया था। वर्ष 2024 में लोक निर्माण विभाग ने निर्माण कार्य में तेजी लाई। इसके बाद अब पुल के दोनों सिरे जुड़ गए हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि पुल जल्द तैयार होकर यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।
इन गांवों को मिलेगा सीधा लाभ
पुल बनने से सुंदरनगर क्षेत्र के धवाल, रोपा, पठाना, सनीहन, बटवाड़ा, ऐहन, क्यान, जरड़, खुराल, धारली, सेरी, सलापड़, कंडार, सनवाली, नेरी और सोल समेत कई गांवों को सीधा लाभ मिलेगा। स्थानीय लोगों को बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों में जाने के लिए लंबा रास्ता तय नहीं करना पड़ेगा। क्षेत्र की आवाजाही और संपर्क व्यवस्था में सुधार होने की उम्मीद है।
पर्यटन और सामरिक दृष्टि से भी अहम
हरनोड़ा पुल मंडी, बिलासपुर और तत्तापानी के रास्ते ऊपरी हिमाचल को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। रामपुर और किन्नौर की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए यह वैकल्पिक मार्ग उपयोगी होगा। पर्यटन के साथ-साथ सामरिक दृष्टि से भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता सुंदरनगर रोशन ठाकुर ने बताया कि पुल के दोनों सिरे नौ सितंबर को जुड़ चुके हैं। विभाग का लक्ष्य नवंबर तक पुल का लोकार्पण करवाना है। शेष निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
पुल बनने से सुंदरनगर क्षेत्र के धवाल, रोपा, पठाना, सनीहन, बटवाड़ा, ऐहन, क्यान, जरड़, खुराल, धारली, सेरी, सलापड़, कंडार, सनवाली, नेरी और सोल समेत कई गांवों को सीधा लाभ मिलेगा। स्थानीय लोगों को बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों में जाने के लिए लंबा रास्ता तय नहीं करना पड़ेगा। क्षेत्र की आवाजाही और संपर्क व्यवस्था में सुधार होने की उम्मीद है।
पर्यटन और सामरिक दृष्टि से भी अहम
हरनोड़ा पुल मंडी, बिलासपुर और तत्तापानी के रास्ते ऊपरी हिमाचल को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। रामपुर और किन्नौर की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए यह वैकल्पिक मार्ग उपयोगी होगा। पर्यटन के साथ-साथ सामरिक दृष्टि से भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता सुंदरनगर रोशन ठाकुर ने बताया कि पुल के दोनों सिरे नौ सितंबर को जुड़ चुके हैं। विभाग का लक्ष्य नवंबर तक पुल का लोकार्पण करवाना है। शेष निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।