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Shimla News: कमला नेहरू अस्पताल को नहीं होने दिया जाएगा शिफ्ट
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महिला समिति सचिवालय तक 15 को निकालेगी मार्च, सरकार को सौंपे जाएंगे एक लाख हस्ताक्षर और मांगपत्र
कहा, सरकार तुरंत वापस ले गायनी विभाग को आईजीएमसी शिफ्ट करने का फैसला
केएनएच के तीसरे चरण का निर्माण कर अस्पताल में उपलब्ध करवाए रोबोटिक सर्जरी, आईवीएफ जैसी सुविधाएं
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश सरकार के राज्य स्तरीय कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) के ओबीजी (ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी) यानी प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के दो भाग कर गायनी विभाग और उसकी ओपीडी को आईजीएमसी शिफ्ट करने के फैसले का अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति लगातार विरोध कर रही है। अब समिति ने इस फैसले को वापस लेने के लिए बड़े आंदोलन का एलान किया है। महिला समिति 15 सितंबर को टॉलैंड से सचिवालय के लिए मार्च निकालेगी। समिति ने महिलाओं समेत समाज के हर वर्ग को इस आंदोलन में साथ आने का आह्वान किया है। जनवादी महिला समिति की राज्य अध्यक्ष रंजना जरेट, सचिव फालमा चौहान, सचिवालय सदस्य सुनिधि ठाकुर, जिला अध्यक्ष रमा रावत और पलक ने यह एलान किया है।
रंजना जरेट ने कहा कि अप्रैल 2026 से महिला समिति धरना-प्रदर्शन कर अस्पताल की गायनी ओपीडी और पूरे विभाग को आईजीएमसी शिफ्ट करने के खिलाफ आंदोलन कर रही है। विभाग और अस्पताल को आईजीएमसी शिफ्ट करने के मामले को लेकर गठित समितियों ने भी राज्य स्तरीय महिला अस्पताल को दो भागों में बांटने को गलत करार दिया है। इसमें मातृ, शिशु एवं स्त्री रोग अस्पताल से गायनी विभाग को अलग नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद सरकार इस अस्पताल को खत्म करने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि एंटीनेटल सेवाओं को केएनएच में रखकर आईजीएमसी, जहां पहले से ही मरीजों की भीड़ है, वहां गायनी ओपीडी और पूरे विभाग को शिफ्ट किए जाने से प्रदेशभर से आने वाली महिला मरीजों की परेशानियां दोगुनी हो गई हैं। महिला मरीजों को केएनएच में जो निशुल्क उपचार मिलता था, उसके लिए उन्हें आईजीएमसी में पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। टेस्ट और दवाएं लेने के लिए उन्हें कतारों में धक्के खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। जरेट ने कहा कि आज तक जो भी मुख्यमंत्री हुए, उन्होंने केएनएच को बेहतर बनाने के लिए कार्य किया। यह पहले मुख्यमंत्री हैं, जो इस अस्पताल का अस्तित्व खत्म करने पर अड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार केएनएच राज्य स्तरीय महिला अस्पताल में ही रोबोटिक सर्जरी, आईवीएफ सहित सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाए। अस्पताल के तीसरे फेज के लिए 20 करोड़ रुपये की निर्माण योजना पर जल्द कार्य शुरू करवाया जाए। इस प्रोजेक्ट में 300 वाहनों की पार्किंग, लैब, वार्ड, स्पेशल वार्ड सहित कर्मचारियों के आवास तक का निर्माण होना है। गायनी के बाद अब केएनएच की एंटीनेटल सेवाओं में आने वाली गर्भवती महिलाओं और प्रसव वाली महिलाओं को आईजीएमसी के नाले में बन रहे भवन में शिफ्ट किए जाने की जो बात हो रही है, वह गर्भवती महिलाओं और नवजातों की जान को खतरे में डालने वाला फैसला होगा।
रंजना जरेट और सचिव फालमा चौहान ने कहा कि सरकार इस जनविरोधी और महिला-विरोधी फैसले को तुरंत वापस ले, जो महिलाओं को बेहतर उपचार से वंचित कर रहा है। महिला समिति अस्पताल को शिफ्ट नहीं होने देगी। इसके लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि अस्पताल की अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है। पूरे शहर और प्रदेश का इस अस्पताल से भावनात्मक लगाव है। इसे बचाने के लिए वे किसी भी हद तक जाएंगे।
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मेडिकल छात्रों की पढ़ाई, प्रैक्टिकल, शैक्षणिक गतिविधियां हो रहीं प्रभावित
महिला समिति का कहना है कि गायनी ओपीडी और विभाग को आईजीएमसी ले जाने के बाद से आईजीएमसी के पीजी और यूजी छात्रों की पढ़ाई, प्रैक्टिकल और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। प्रैक्टिकल के लिए महिला मरीजों को आईजीएमसी से केएनएच लाकर परेशान किया जा रहा है। छात्रों की पढ़ाई के लिए भी कमला नेहरू अस्पताल का विभाजन तर्कसंगत नहीं है।
सेवा विस्तार पर बैठे अधिकारियों ने लिया यह महिला विरोधी फैसला
जनवादी महिला समिति की सचिवालय सदस्य सुनिधि ठाकुर ने कहा कि गायनी ओपीडी को आईजीएमसी शिफ्ट करने की कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। 16 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक में गायनी की महिला मरीजों के लिए रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए आईजीएमसी में 20 बिस्तरों की मांग उठाई गई थी। इस पर मुख्यमंत्री ने 50 बिस्तर देने को कहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि सेवा विस्तार पर बैठे आईजीएमसी और केएनएच के अधिकारियों ने अपने स्वार्थ को देखते हुए रातों-रात ओपीडी और गायनी विभाग को पूरी तरह आईजीएमसी शिफ्ट कर दिया। इससे महिला मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है और ऐतिहासिक अस्पताल का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है।
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कहा, सरकार तुरंत वापस ले गायनी विभाग को आईजीएमसी शिफ्ट करने का फैसला
केएनएच के तीसरे चरण का निर्माण कर अस्पताल में उपलब्ध करवाए रोबोटिक सर्जरी, आईवीएफ जैसी सुविधाएं
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश सरकार के राज्य स्तरीय कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) के ओबीजी (ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी) यानी प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के दो भाग कर गायनी विभाग और उसकी ओपीडी को आईजीएमसी शिफ्ट करने के फैसले का अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति लगातार विरोध कर रही है। अब समिति ने इस फैसले को वापस लेने के लिए बड़े आंदोलन का एलान किया है। महिला समिति 15 सितंबर को टॉलैंड से सचिवालय के लिए मार्च निकालेगी। समिति ने महिलाओं समेत समाज के हर वर्ग को इस आंदोलन में साथ आने का आह्वान किया है। जनवादी महिला समिति की राज्य अध्यक्ष रंजना जरेट, सचिव फालमा चौहान, सचिवालय सदस्य सुनिधि ठाकुर, जिला अध्यक्ष रमा रावत और पलक ने यह एलान किया है।
रंजना जरेट ने कहा कि अप्रैल 2026 से महिला समिति धरना-प्रदर्शन कर अस्पताल की गायनी ओपीडी और पूरे विभाग को आईजीएमसी शिफ्ट करने के खिलाफ आंदोलन कर रही है। विभाग और अस्पताल को आईजीएमसी शिफ्ट करने के मामले को लेकर गठित समितियों ने भी राज्य स्तरीय महिला अस्पताल को दो भागों में बांटने को गलत करार दिया है। इसमें मातृ, शिशु एवं स्त्री रोग अस्पताल से गायनी विभाग को अलग नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद सरकार इस अस्पताल को खत्म करने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि एंटीनेटल सेवाओं को केएनएच में रखकर आईजीएमसी, जहां पहले से ही मरीजों की भीड़ है, वहां गायनी ओपीडी और पूरे विभाग को शिफ्ट किए जाने से प्रदेशभर से आने वाली महिला मरीजों की परेशानियां दोगुनी हो गई हैं। महिला मरीजों को केएनएच में जो निशुल्क उपचार मिलता था, उसके लिए उन्हें आईजीएमसी में पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। टेस्ट और दवाएं लेने के लिए उन्हें कतारों में धक्के खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। जरेट ने कहा कि आज तक जो भी मुख्यमंत्री हुए, उन्होंने केएनएच को बेहतर बनाने के लिए कार्य किया। यह पहले मुख्यमंत्री हैं, जो इस अस्पताल का अस्तित्व खत्म करने पर अड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार केएनएच राज्य स्तरीय महिला अस्पताल में ही रोबोटिक सर्जरी, आईवीएफ सहित सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाए। अस्पताल के तीसरे फेज के लिए 20 करोड़ रुपये की निर्माण योजना पर जल्द कार्य शुरू करवाया जाए। इस प्रोजेक्ट में 300 वाहनों की पार्किंग, लैब, वार्ड, स्पेशल वार्ड सहित कर्मचारियों के आवास तक का निर्माण होना है। गायनी के बाद अब केएनएच की एंटीनेटल सेवाओं में आने वाली गर्भवती महिलाओं और प्रसव वाली महिलाओं को आईजीएमसी के नाले में बन रहे भवन में शिफ्ट किए जाने की जो बात हो रही है, वह गर्भवती महिलाओं और नवजातों की जान को खतरे में डालने वाला फैसला होगा।
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रंजना जरेट और सचिव फालमा चौहान ने कहा कि सरकार इस जनविरोधी और महिला-विरोधी फैसले को तुरंत वापस ले, जो महिलाओं को बेहतर उपचार से वंचित कर रहा है। महिला समिति अस्पताल को शिफ्ट नहीं होने देगी। इसके लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि अस्पताल की अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है। पूरे शहर और प्रदेश का इस अस्पताल से भावनात्मक लगाव है। इसे बचाने के लिए वे किसी भी हद तक जाएंगे।
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मेडिकल छात्रों की पढ़ाई, प्रैक्टिकल, शैक्षणिक गतिविधियां हो रहीं प्रभावित
महिला समिति का कहना है कि गायनी ओपीडी और विभाग को आईजीएमसी ले जाने के बाद से आईजीएमसी के पीजी और यूजी छात्रों की पढ़ाई, प्रैक्टिकल और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। प्रैक्टिकल के लिए महिला मरीजों को आईजीएमसी से केएनएच लाकर परेशान किया जा रहा है। छात्रों की पढ़ाई के लिए भी कमला नेहरू अस्पताल का विभाजन तर्कसंगत नहीं है।
सेवा विस्तार पर बैठे अधिकारियों ने लिया यह महिला विरोधी फैसला
जनवादी महिला समिति की सचिवालय सदस्य सुनिधि ठाकुर ने कहा कि गायनी ओपीडी को आईजीएमसी शिफ्ट करने की कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। 16 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक में गायनी की महिला मरीजों के लिए रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए आईजीएमसी में 20 बिस्तरों की मांग उठाई गई थी। इस पर मुख्यमंत्री ने 50 बिस्तर देने को कहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि सेवा विस्तार पर बैठे आईजीएमसी और केएनएच के अधिकारियों ने अपने स्वार्थ को देखते हुए रातों-रात ओपीडी और गायनी विभाग को पूरी तरह आईजीएमसी शिफ्ट कर दिया। इससे महिला मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है और ऐतिहासिक अस्पताल का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है।