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एचपीयू में नया पद सृजित कर डिप्टी कंट्रोलर को सौंपी वित्तीय शक्तियां
Thu, 21 Nov 2019 12:14 PM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Thu, 21 Nov 2019 12:14 PM IST
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HPU Shimla
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में लगातार वित्तीय स्वायत्ता बहाली को मुख्य मुद्दा बनाने वाले कर्मचारियों पर वित्त मामलों की नई व्यवस्था भारी पड़ गई है। स्वायत्तता देना तो दूर, इसके विपरीत विवि प्रशासन ने डिप्टी कंट्रोलर का पद सृजित कर अधिकारी बैठाकर उसे ही वित्त मामलों की कमान दे दी है।
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वित्त से संबंधित सभी फाइलें डिप्टी कंट्रोल वित्त और लेखा से होकर ही जाएंगी। एक नवंबर को कुल सचिव ने बाकायदा डिप्टी कंट्रोलर (एफएंडए) के कार्य और उसकी पावर को लेकर अलग से अधिसूचना जारी कर विवि की वेबसाइट पर डाल सार्वजनिक कर दी है।
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अधिकारी पर विवि इस कदर मेहरबान है कि उसके कार्यालय पर ही करीब 65 हजार फर्नीचर पर ही खर्च कर दिया गया। अधिसूचना जारी होने के बाद से ही अब वित्त से जुड़े मामलों की फाइलें डिप्टी कंट्रोलर के कार्यालय से ही होकर ही आगे जाना शुरू भी हो गई हैं। विश्वविद्यालय के कर्मचारी इस बदलती व्यवस्था को लेकर आक्रोश जताने विवि के कुलपति से भी एक बार मिल चुके हैं, मगर वे खुलकर इसका विरोध करने की हिम्मत जुटा नहीं पाए हैं।
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अंदर खाते विवि प्रशासन के इस फैसले को विवि की वित्तीय स्वायत्तता पर प्रहार बताया जा रहा है। चर्चा यह भी है कि डिप्टी कंट्रोलर के सहयोग से अब एसओ और सहायक कंट्रोलर भी अब एसएएस से ही लाने की तैयारी है। उधर, कुलपति प्रो सिकंदर कुमार से संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो पाई।
डिप्टी कंट्रोलर को सौंपी गई हैं ये जिम्मेदारियां
कुल सचिव कार्यालय से जारी अधिसूचना में लिखा है कि पूर्व में जारी तमाम आदेशों को निरस्त करते हुए कुलपति ने डिप्टी कंट्रोलर वित्त और लेखा को यह कार्य सौंपे हैं। वित्त अधिकारी होने के बावजूद वार्षिक लेख और बैलेंस शीट बनाने, पेंशन फंड और इससे संबंधित सभी कार्य, स्टोर पर्चेज ऑफिस की सभी फाइलें डिप्टी कंट्रोलर कार्यालय से होकर ही जाएंगी। इसके अलावा कंपाइलेशन, जीपीएफ, इंटरनल ऑडिट के अलावा बजट शाखा के सभी मामले डिप्टी कंट्रोलर के माध्यम से ही आगे जाएंगे।