130 करोड़ होगी विवि की सालाना अनुदान राशि: जयराम
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प्रदेश विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विवि को हर वर्ष सरकार की ओर से मिलने वाले अनुदान में 15 करोड़ की बढ़ोतरी करने की घोषणा की।
अब विवि का वार्षिक अनुदान 115 करोड़ से बढ़कर 130 करोड़ हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले बजट में इसे और बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा।
इसके अलावा विश्वविद्यालय की वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता बहाली की मांग पर 28.1 को समाप्त करने और घणाहट्टी में नए कैंपस को विकसित करने के लिए चिन्हित की गई जमीन को भी जल्द विवि के नाम किए जाने की बात कही।
उन्होंने कुलपति और विवि समुदाय को विवि के नाम 40 बीघा भूमि मिलने पर बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विवि प्रशासन यह ख्याल रखे कि जो भी भावी विकास योजनाएं बनें, उसमें आने वाले दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाए।
कुलपति ने की थी 150 करोड़ अनुदान की मांग
विश्वविद्यालय कई सदियों के लिए बनते हैं। अभी तक कई संस्थानों में ऐसी प्लानिंग की कमी नजर आती है। उन्होंने विश्वविद्यालय के 49वें स्थापना दिवस पर विवि समुदाय को बधाई देते हुए कहा कि आज विश्वविद्यालय इन 49 सालों में कई उतार चढ़ाव देने और आज देश के नामी संस्थानों में पहचान बनाई है। उन्होंने विवि कैंपस को जल्द वाईफाई सुविधा से लैस करने को कहा।
विश्वविद्यालय के कुलपति ने स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री से विवि के अनुदान में बढ़ोतरी कर इसे 115 से 150 करोड़ किए जाने की मांग उठाई थी, ताकि शिक्षकों और गैर शिक्षकों की भर्ती हो। अनुदान में की गई बढ़ोतरी से अब विश्वविद्यालय शिक्षक भर्ती जैसे कार्यों को आगे बढ़ा पाएगा और जरूरी निर्माण और विकासात्मक गतिविधियां जारी रख पाएगा।
प्रदेश भर के कॉलेजों में खुलेंगे सुगम्य पुस्तकालय : जयराम
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि सुगम्य पुस्तकालय सुविधा देना एक सराहनीय प्रयास है, यह प्रयास शिमला तक सीमित न रहे। इसके लिए उन्होंने विवि प्रशासन और शिक्षक अजय श्रीवास्तव को बधाई देते हुए कहा कि सुझाव के मुताबिक प्रदेश के अन्य कॉलेजों और स्कूलों में भी इस तरह के पुस्तकालय खोले जाएंगे।
सरकार इसके लिए पूरे प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के इस प्रयास से आगे बढ़ने की चाह रखने वाले छात्रों की राह आसान होगी। यह अपने आप में एक पुण्य का काम है। सरकार इसमें पूरा सहयोग करेगी। करीब बीस लाख की लागत से इस पुस्तकालय को बनाया गया है, जिसमें दिव्यांग छात्र छात्राओं की सुविधा के लिए बने आधुनिक सॉफ्टवेयर उपलब्ध करवाए गए हैं।