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HP politics: जगत नेगी बोले- प्रदेश सरकार से सौतेला व्यवहार कर रहा चुनाव आयोग

Mon, 29 Apr 2024 07:22 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 29 Apr 2024 07:22 PM IST
सार

 सोमवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन शिमला में प्रेस वार्ता में नेगी ने कहा कि आयोग को कई प्रस्तावों को मंजूर करने के मामले भेजे हैं, लेकिन आयोग मंजूरी नहीं दे रहा है।

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HP Politics: Jagat Negi said- Election Commission is giving step-motherly treatment to the state govt.
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि चुनाव आयोग प्रदेश सरकार से भेदभाव कर रहा है। उन्होंने केंद्रीय चुनाव आयोग में होने वाली नियुक्तियों को लेकर भी केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया। सोमवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन शिमला में प्रेस वार्ता में नेगी ने कहा कि आयोग को कई प्रस्तावों को मंजूर करने के मामले भेजे हैं, लेकिन आयोग मंजूरी नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ कार्य तो ऐसे हैं जो आजकल के मौसम में ही पूरे होने हैं।

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नेगी ने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है। चुनाव आचार संहिता लगने से पहले कई श्रेणी के शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो गई थी, लेकिन अब परिणाम घोषित नहीं होने के चलते शिक्षकों को स्कूलों में नियुक्तियां नहीं दे पा रहे हैं। नेगी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि वह प्रदेश में विकास कार्यों में बाधा डाल रहा है। उन्होंने आयोग पर प्रदेश के साथ विकास के मामलों को लेकर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा है कि लंबे समय से विभिन्न विभागों से संबंधित 34 मामलों में से 27 आयोग के पास अनुमति के लिए लंबित पड़े हैं। उन्होंने आयोग पर जानबूझ कर इन्हें लटकाने का आरोप लगाया। नेगी ने कहा कि प्रदेश में चुनाव आचार संहिता के चलते आवश्यक कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए हैं।
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प्रदेश के ऊपरी भागों में मौसम के अनुरूप ही सड़कों या अन्य जनहित से जुड़े कार्य थोड़े समय ही होते हैं। अगर इस समय यह कार्य पूरे नहीं हुए तो इसका नुकसान लोगों को होगा। प्रदेश में चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले ही सरकार ने इन आवश्यक व नियमित कार्यों को पूरा करने के लिए आयोग से अनुमति मांगी थी। सरकार ने आयोग से उन विभागों में नियुक्तियों के परिणाम निकालने की अनुमति भी मांगी थी, जिनकी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उद्योग विभाग में स्कूलों के लिए डेस्क व बेंच खरीद के लिए टेंडर लगने थे, वह भी नहीं लग रहे हैं। जबकि स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो चुकी है। इसी तरह अध्यापकों के रिक्त पद भी भरे जाने थे। मंत्री ने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि वह प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए जनहित के कार्यों की पूरा करने की अनुमति सरकार को दे।

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कांग्रेस ने पूछा, उपचुनाव हारने पर जयराम ने क्यों नहीं दिया इस्तीफा
मुख्य संसदीय सचिव मोहन लाल ब्राक्टा और किशोरी लाल ने पलटवार करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर में जरा सी भी नैतिकता होती तो सत्ता में रहते उपचुनाव में चारों सीटें हारने के तुरंत बाद इस्तीफा दे देते। जयराम ने सत्ता में रहते सभी चार सीटें हारने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है। उन्होंने कहा कि नैतिकता का पाठ पढ़ाने वालों ने पहले खुद इस पर अमल क्यों नहीं किया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अक्तूबर 2021 में भाजपा ने सत्ता में रहते हुए प्रदेश में मंडी लोकसभा सीट के साथ-साथ अर्की, जुब्बल-कोटखाई और फतेहपुर विधानसभा सीटों के उपचुनाव हारे, तो पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की नैतिकता कहां थी।

पूर्व मुख्यमंत्री की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। वह सत्ता के लोभ में किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं। ब्राक्टा और किशोरी लाल ने कहा कि जयराम ठाकुर हवा-हवाई बातें करते हैं। उनमें नैतिकता नाम की कोई चीज नहीं है। वह हमेशा ही लोगों को गुमराह करने में लगे रहते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता लाने का प्रयास जयराम ठाकुर के लोभ का ही नतीजा है। धनबल के माध्यम से भाजपा ने जनादेश की खरीद-फरोख्त करने का प्रयास किया, जिसे हिमाचल प्रदेश की जनता कभी भी स्वीकार नहीं करेगी।

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