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देश के 85 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़ा ऐतिहासिक फैसला

Thu, 31 Dec 2015 10:14 AM IST
Updated Thu, 31 Dec 2015 10:14 AM IST
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HP High court big decision on medical reimbursement of 85 lakh central employees

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार को आदेश जारी किए हैं कि मेडिकल रिइंबर्समेंट के लिए 35 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 50 लाख सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम के तहत लाया जाए।

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पहले यह लाभ केवल इस स्कीम के कार्डधारकों को ही मिलता था। यह लाभ उन्हीं शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को मिलता था, जिन शहरों में यह योजना लागू की गई है। अभी तक इस स्कीम का लाभ केवल देश के 26 शहरों में रहने वाले कर्मचारियों और पेंशनरों को ही दिया जा रहा है।
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न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जो भी कर्मचारी और पेंशनर्स अन्य शहरों में रह रहे हैं, उन्हें भी इस स्कीम के दायरे में लाया जाए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिए कि छह माह के भीतर इन कर्मचारियों से ऑप्शन लिए जाए कि वे इस स्कीम के तहत आना चाहते हैं या सीएस (एमएस) रूल्स 1944 के तहत लाभ लेना चाहते हैं।

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कोर्ट ने भेदभाव को ठहराया गलत

HP High court big decision on medical reimbursement of 85 lakh central employees

कोर्ट ने नॉन सीजीएचएस और सीजीएचएस कर्मचारियों में भेदभाव को असंवैधानिक ठहराया। अदालत ने अपने फैसले में ये स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में ये आवश्यक है कि जो लाभ इस स्कीम के तहत प्रतिवादी शंकरलाल शर्मा को दिया जाना है, वही लाभ उस तरह के कर्मचारियों को भी दिया जाए।

हाईकोर्ट ने कहा कि प्रत्येक सरकार का यह दायित्व बनता है कि वह अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य की रक्षा करे। मामला स्वास्थ्य से जुड़ा होने के कारण इसे मानवीय नजर से देखा जाना जरूरी है। ऑल इंडिया रेडियो से सेवानिवृत्त शंकरलाल शर्मा को फिक्स तौर पर 100 रुपये मेडिकल भत्ता दिया जाता था। ऐसा इसलिए था कि वह नॉन सीजीएचएस शहर में आता था। बीमार होने पर शर्मा ने अपना इलाज मोहाली के निजी अस्पताल में करवाया।

रिंइबर्समेंट देने से इंकार करने पर पहुंचे कोर्ट

HP High court big decision on medical reimbursement of 85 lakh central employees

विभाग ने यह कहकर रिइंबर्समेंट करने से इंकार कर दिया कि शिमला में रहने के कारण वह नॉन सीजीसीएच क्षेत्र में आता है। उसके बिल पास नहीं किए जा सकते हैं। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के इस फैसले को नाजायज ठहराते हुए आदेश जारी किए कि प्रार्थी को तीन महीने के भीतर बिल का भुगतान किया जाए। यदि सरकार देरी करती है तो उसे 12 प्रतिशत ब्याज सहित बिल में मांगी गई राशि का भुगतान करना होगा।

कोर्ट की टिप्पणी
हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा कि समाजवाद हमारे संविधान की प्रस्तावना का मुख्य आधार है। कल्याणकारी राज्य हमारे संविधान की मुख्य विशेषता है। केंद्र सरकार की ओर से मेडिकल बिलों को रिइंबर्स न करना और उन्हें ऑप्शन के लिए इस कारण मौका न देना कि वे सीजीएचएस शहर से संबंध नहीं रखते हैं, सही नहीं है। अदालत ने इसे भेदभावपूर्ण और गलत तरीके से तैयार किया गया दस्तावेज करार दिया गया है।

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