शहीद परिवारों की अनुग्रह राशि बढ़ा सकती है सरकार
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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि सरकार शहीद परिवारों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को बढ़ाने पर विचार करेगी। अभी प्रदेश में शहीद परिवारों को अलग-अलग प्रावधानों में अनुग्रह राशि दी जाती है। युद्ध तथा पठानकोट जैसे स्पेशल ऑपरेशन में शहीद परिवार को 20 लाख रुपये अनुग्रह राशि दी जाती है। अन्य मामले में यह राशि 5 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
शांडिल ने यह जानकारी विधायक अनिरुद्ध सिंह के प्रश्न के उत्तर में दी। नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल, विधायक गोविंद ठाकुर, इंद्र सिंह और अजय महाजन ने भी अनुपूरक सवाल पूछे। कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि हिमाचल में बीते तीन साल के दौरान 35 सैनिक शहीद हुए हैं। पहले अनुग्रह राशि 3 लाख रुपये दी जाती थी। 3 मई 2015 को इसे बढ़ाकर 5 लाख किया गया।
शहीद सैनिकों के आश्रितों को केंद्रीय सैनिक बोर्ड की ओर से जारी किए गए प्रमाण पत्र के आधार पर रोजगार देने की प्रक्रिया जारी है। बताया कि 4 जून 2015 को मणिपुर ऑपरेशन में शहीद 7 सैनिकों के परिवारों के एक आश्रित को अनुबंध आधार पर नौकरी देने के लिए विशेष नीति बनाई गई है। उक्त शहीद 5 परिवारों के आवेदन मिले हैं। इसमें एक को रोजगार दिया गया है, जबकि अन्य 4 के आवेदन पर प्रक्रिया जारी है।
नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने सरकार से सभी शहीदों को एक समान अनुग्रह अनुदान राशि देने की मांग की। उनका कहना था कि फौजी चाहे युद्ध में शहीद हुआ हो या फिर नौकरी या रैकी करते दौरान। इसको एक समान राशि मिलनी चाहिए। विधायक अजय महाजन ने शहीदों के नाम पर गेट न लगाने का मामला भी विधानसभा में उठाया। इस पर मंत्री ने कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
हर हिमाचली पर 47,284 रुपये कर्ज का बोझ : धूमल
नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल ने कहा कि हिमाचल में वित्त वर्ष 2016-17 के बजट अनुमानों में मुख्यमंत्री को गुमराह किया गया है। अफसरशाही पर सीएम को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बजट अभिभाषण में पहले हो चुकी कई घोषणाएं भी फिर करवा दी गई हैं। कहा कि इसमें आय के साधन बढ़ाने पर कोई भी ध्यान नहीं दिया गया है। आज हर हिमाचली पर 47,284 रुपये कर्ज का बोझ है। धूमल ने मुस्कराते हुए मुख्यमंत्री पर तंज भी कसा, - आप इतने तंगदिल नहीं हो सकते, आखिर आप राजा हैं।
धूमल ने कहा कि सरकार बजट में आय जुटाने में असफल दिख रही है, जबकि केंद्र सरकार राज्य को भरपूर आर्थिक सहायता दे रही है। कुल बजट में 19 प्रतिशत से अधिक की राशि ऋणों से जुटाई जाएगी, जबकि ऋणों की वापसी पर बजट का महज छह प्रतिशत हिस्सा ही खर्च होगा। इससे राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा। इसके बावजूद सरकार ने केंद्र सरकार का धन्यवाद तक नहीं किया। उन्होंने मुख्यमंत्री पर केंद्र सरकार की योजनाओं को अपने नाम से शुरू करने का आरोप लगाया। धूमल ने बिजली बोर्ड में एलईडी बल्बों के वितरण मामले की जांच की मांग की।
उन्होंने प्रदेश को 2017 तक खुला शौच मुक्त करने के एलान पर कहा कि जब राजधानी शिमला ही खुला शौचमुक्त नहीं है तो पूरे प्रदेश को कैसे शौचमुक्त किया जाएगा। पीलिया पर सरकार बिलकुल गंभीर नहीं है। एक दिन पहले सचिवालय के एक कर्मचारी की भी मौत हुई है। कहा कि बजट में मनोरंजन कर घटाकर 10 प्रतिशत करने की सरकार की घोषणा भी गुमराह करने वाली है। उनकी सरकार में आठ मई 2012 की अधिसूचना के तहत मनोरंजन कर पहले से ही घटा कर 10 प्रतिशत किया जा चुका है।
जंगली-जानवरों और आवारा पशुओं से बचाने के लिए खेतों में बाड़ लगाकर बिजली का करंट देने की सरकार की घोषणा पर कहा कि सरकार को इसमें कानूनी राय लेनी चाहिए कि ऐसा करना सही है या गलत। पूर्व सरकार के कार्यकाल मेें कपिल सिब्बल द्वारा शुरू की गई रूसा प्रणाली सही नहीं है। इस पर विचार होना चाहिए। उन्होंने बजट में विधायक निधि को 75 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ करने की घोषणा का स्वागत किया। धूमल ने प्रेस के लिए की गई घोषणाओं पर भी पूछा कि प्रेस क्लब को हर साल पैसा देने की बातें होती हैं, वे जानना चाहते हैं कि अब तक कितने प्रेस क्लब बने।