हिमाचल में बंपर सेब फसल की उम्मीद, 1400 चिलिंग आवर्स पूरे
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हिमाचल में हो रही भारी बर्फबारी से बागवानों को सेब की बंपर पैदावार होने की उम्मीद जग गई है। जनवरी में सेब पेड़ों के लिए जरूरी 1400 चिलिंग आवर्स लगभग पूरे हो गए हैं। ऐसे में मौसम ने बागवानों की पहली बड़ी चिंता दूर कर दी है।
अगर फ्लावरिंग के समय मौसम ने इसी तरह साथ दिया तो इस साल के मुकाबले 1000 करोड़ रुपये की अधिक फसल होने के आसार हैं। कृषि-बागवानी के लिए बर्फबारी और बारिश संजीवनी मानी जा रही है। आगामी सीजन में 4 हजार करोड़ का प्रत्यक्ष और परोक्ष सेब कारोबार होने का अनुमान है। इससे प्रदेश के बागवान गदगद हैं।
न्यूनतम 1400 चिलिंग आवर्स लगभग पूरे हुए
जनवरी की बर्फबारी से सेब के लिए जरूरी न्यूनतम 1400 चिलिंग आवर्स लगभग पूरे हो गए हैं। अभी और बर्फबारी होने से रही-सही कसर भी पूरी हो जाएगी। बागवानी विशेषज्ञ मानते हैं कि सेब की अच्छी फसल के लिए दिसंबर से फरवरी तक 1200 से 1400 घंटे तक 7 डिग्री तक तापमान यानी चिलिंग आवर्स अनिवार्य होते हैं।
इस दौरान सेब और अन्य फलदार पेड़ सुप्तावस्था में होते हैं। इसके बाद जब फूल खिलते हैं तो सेब के पेड़ों को औसतन 18 से 24 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत रहती है। ऐसे तापमान में सेब के पेड़ों में फ्लावरिंग अच्छी होती है। इसे फूल परागण के लिए अच्छा माना जाता है और फूलों की सेटिंग भी अच्छी होती है।
इससे गुणवत्ता वाले फलों का उत्पादन अधिक होता है। पिछले साल बागवानों को मौसम की अनिश्चितता का सामना करना पड़ा था और सेब की पैदावार करीब तीस फीसदी कम रही थी। अच्छे मौसम से फलदार पेड़ों पर कीटों के हमलों और बीमारियों से भी काफी हद तक निजात मिलेगी।
चेरी, किवी, पलम और खुमानी को भी फायदा
किन्नौर के बागवान अनिल नेगी, धर्मसेन, हेमराज, राकेश कुमार थानाधार, ननखड़ी के विपिन, चरण सिंह, नीटू कायथ, सतवीर, ललित, कुमारसैन के संजीव कायथ और दिनेश हिमराल सहित अन्य बागवानों का कहना है कि मौसम यूं ही साथ देता रहा तो सेब के साथ चेरी, किवी, पलम, बादाम, आड़ू और खुमानी की पैदावार भी ज्यादा होगी।
फरवरी तक सेब के पेड़ों को 1400 से अधिक चिलिंग आवर्स मिलने की उम्मीद है। इससे सेब की अच्छी पैदावार होगी। फ्लावरिंग के दौरान मौसम गर्म चाहिए और तापमान 18 से 24 डिग्री सेल्सियस उपयुक्त माना जाता है। ऐसे तापमान में अच्छी फ्लावरिंग और फलों की अच्छी सेटिंग होती है।
-डॉ. एसपी भारद्वाज, बागवानी विशेषज्ञ