साल 2022 तक प्राकृतिक कृषि का आदर्श मॉडल बनेगा हिमाचल : देवव्रत
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राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने केंद्र सरकार के बजट में शून्य लागत प्राकृतिक कृषि को देश में लागू करने के प्रस्ताव पर पीएम मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि यह हिमाचल के लिए गर्व की बात है कि प्रदेश सरकार पहले से प्राकृतिक कृषि पर कार्य कर रही है। हम तेजी से प्राकृतिक कृषि राज्य की ओर बढ़ रहे हैं।
राजभवन में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार गत वर्ष करीब पौने तीन हजार किसानों को इस कृषि पद्धति के तहत लाई है। इस वर्ष 50 हजार किसानों को इसके दायरे में लाया जाएगा। इस कृषि पद्धति के जनक पद्मश्री सुभाष पालेकर के चार बड़े शिविर करवाए जा चुके हैं। इनमें प्रत्येक में 1000 किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। यह ऐसी कृषि पद्धति है, जो जमीन की उर्वरा शक्ति को तो बढ़ाती ही है, साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए भी उपयोगी है।
पानी की खपत कम होती है। इससे किसानों की आय कई गुणा बढ़ जाती है। वर्ष 2022 तक हिमाचल को पूर्ण रूप से प्राकृतिक कृषि राज्य बना दिया जाएगा। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि यह सेब फसल के लिए भी कारगर है। सेब के आकार और कलर स्वाभाविक रूप से आता है और पेड़ स्वस्थ रहता है। देश के कृषि वैज्ञानिक भी इस दिशा में सोचेंगे और इस पद्धति पर शोध की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
सितंबर में गुरुकुल आएंगे केंद्रीय कृषि मंत्री
राज्यपाल ने कहा कि अन्य राज्यों के गवर्नरों को भी इस कृषि पद्धति के प्रचार को साथ जोड़ा जाएगा। हाल ही में उनकी केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात हुई थी। उन्होंने कृषि मंत्रालय के अन्य अधिकारियों के साथ गुरुकुल कुरुक्षेत्र के कृषि फार्म का दौरा करने का आश्वासन दिया है। यहां पिछले 10 वर्षों से प्राकृतिक कृषि की जा रही है। केंद्रीय मंत्री सितंबर में यहां किसानों के लिए तैयार किए गए नि:शुल्क प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन भी करेंगे।
पद्मश्री सुभाष पालेकर राज्यपाल आचार्य देवव्रत के साथ पहुंचे टभोग गांव
सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती के अंतर्गत कृषक भ्रमण कार्यक्रम में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने शिमला ग्रामीण के टभोग गांव का दौरा किया। उन्होंने सुरेश ठाकुर के खेतों का मुआयना किया, जिन्होंने प्राकृतिक कृषि में सब्जी उत्पादन किया है।
पद्मश्री सुभाष पालेकर भी राज्यपाल के साथ थे। टभोग गांव के लोगों ने सामूहिक तौर पर निर्णय लिया कि पूरा गांव अब प्राकृतिक कृषि करेगा। राज्यपाल ने किसानों को इस कृषि पद्धति के लाभ बताए और उन्हें इसे पूर्ण रूप से अपनाने का आग्रह किया।
पद्मश्री सुभाष पालेकर ने कहा कि प्राकृतिक कृषि के मॉडल को दूरवर्ती गांव में देखकर उन्हें यह किसी चमत्कार से कम नहीं लगा। यहां पहाड़ी गाय का पालन हो रहा है और और प्राकृतिक कृषि के मॉडल तैयार किए गए हैं।