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पेड़ बचाने हैं तो पूरे देश को लेनी होगी हिमाचल प्रदेश से सीख
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 06 Oct 2018 02:17 PM IST
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देश में यदि पेड़ बचाने हैं तो हिमाचल प्रदेश की 68 सदस्यों वाली विधानसभा से सीख लेनी होगी। यह विधानसभा अपने पेपरलेस काम के चलते हर साल छह हजार पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने से बचाती है। यहां सवाल जवाब से लेकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव तक सब कुछ विधायकों की टेबल पर लगी टचस्क्रीन पर मौजूद है। विधायकों को वोट करने के लिए भी हां या न करने की जरूरत नहीं पड़ती। बिल पास करने के लिए अपना वोट विधायक टचस्क्रीन के माध्यम से ही देते हैं।
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शुरुआत में तो आपको यह देखकर अचंभा लगेगा कि ऐसा कैसे संभव है, लेकिन विधानसभा की आईटी टीम और अन्य विभागों ने यह कर दिखाया है। काम आसान नहीं था। विधानसभा के अधिकारियों ने इसे करने का मन बनाया और भारत सरकार को डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) भेज दी। पहले तो केंद्र ने यह कह कर मना कर दिया कि हम इसके लिए ग्रांट नहीं दे सकते, लेकिन बाद में सरकार ने पूरे कांसेप्ट को समझा और हामी भरी।
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फंडिंग के साथ केंद्र ने पूरा सहयोग किया और यह प्रयोग मील का पत्थर साबित हुआ। 2013 सिंतबर में विधानसभा ने इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया और 2014 का पहला मानसून सत्र पेपरलेस हुआ। शुरुआत में कुछ समस्याएं आईं, जिन्हें धीरे-धीरे सुलझा लिया गया। अब यह आलम है कि पेपरलेस होने के बाद से 14 विधानसभा सत्र का काम पूरा हो चुका है।
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विंटर सेशन में धर्मशाला होती है विधानसभा
हिमाचल विधानसभा का शीतकालीन सत्र जब धर्मशाला में होता है। उस समय यहां से हार्डवेयर वहां पहुंच जाता है और पेपरलेस काम की यह प्रणाली वहां भी उतनी ही तेजी से काम करती है जितनी की यहां।
22 राज्यों ने लिख कर दिया केंद्र सरकार को
देश के 22 राज्यों ने केंद्र सरकार को यह कांसेप्ट देखने के बाद यह लिख कर दिया है कि उनके यहां भी इस प्रणाली को विकसित करने में मदद की जाए।
हरियाणा विधानसभा भी इस ओर अग्रसर
हरियाणा विधानसभा की टीम भी हिमाचल विधानसभा का कामकाज देख चुकी है। हरियाणा में भी जल्द ही इस प्रणाली को लागू किया जाएगा। सूबे के 90 विधायकों को भी इस प्रणाली के आधार पर काम करना पड़ेगा। जिसके लिए उन्हें अभी से कमर कसनी होगी।
यहां माननीयों ने कोई अड़ंगा नहीं डाला
हिमाचल विधानसभा एक ऐसी विधानसभा है जहां पर विकास की इस इबारत को लिखने के लिए किसी माननीय ने अड़ंगा नहीं डाला। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष दोनों धड़ों ने एक स्वर में पेपरलेस विधानसभा के लिए समर्थन दिया।
बहुत से लोग हमारे इस प्रयास को देखने के लिए आते हैं। देश भर में हिमाचल पहला ऐसा राज्य है जिसने इस काम को कर दिखाया। - डा. राजीव बिंदल, स्पीकर, हिमाचल प्रदेश विधानसभा