टीबी को भगाने के लिए केरल का मॉडल अपनाएगा हिमाचल
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हिमाचल प्रदेश को टीबी मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग केरल प्रदेश की तर्ज पर मुहिम छोड़ेगा। जिस प्रकार केरल में टीबी रोग के निवारण के लिए अभियान चलाया जा रहा है, उसी तर्ज पर स्वास्थ्य विभाग हिमाचल की पंचायतों के लोगों को सहभागिता निभाने के लिए जागरूकता अभियान चलाएगा।
केरल के बाद हिमाचल टीबी मुक्त होने के लिए धरातल पर काम कर रहा है। जिसके परिणाम पिछले दो साल में देखने को भी मिले हैं। हिमाचल में सबसे ज्यादा टीबी रोगी सामने आने का कारण यहां पर लोगों की टीबी संबंधित टेस्ट प्रक्रिया को सुदृढ़ करने से हुई है।
अब स्वास्थ्य विभाग केरल के लोगों की तरह यहां के लोगों से भी टीबी की जंग से लड़ने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर काम कर रहा है, ताकि सभी की सहभागिता से सूबे का टीबी मुक्त किया जा सकें। उधर, स्वास्थ्य विभाग के प्रदेश क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ. आरके बारिया ने कहा कि केरल की तर्ज पर लोगों को टीबी रोगी प्रोत्साहन देने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।
यह है केरल का मॉडल
केरल में किसी व्यक्ति को टीबी रोग होता है, तो उस पंचायत के लोग उस व्यक्ति की पूरी देखभाल करने के लिए आगे आते हैं। उसकी दवाइयों से लेकर खाना-पीने की रूटीन के लिए लोगों अपने सहभागिता निभाते हैं, ताकि वह व्यक्ति जल्द ठीक हो सके ।
हिमाचल में अभी भी छुपाई जाती है बीमारी- हिमाचल में अभी भी टीबी रोग को व्यक्ति छुपाते हैं। जिसके कारण भी टीबी रोग से व्यक्ति उभर नहीं पाया है। अगर किसी व्यक्ति को टीबी रोग हो भी जाता है, तो गांव के लोग उससे दूरियां बनाना शुरू कर देते हैं, जिसके कारण भी टीबी रोगी का मनोबल गिर जाता है, जबकि ऐसी परिस्थिति में व्यक्ति का मनोबल बढ़ाने की जरूरत होती है।