Himachal News: हिमाचल के सरकारी स्कूलों में दस हजार शिक्षक टेट पास नहीं, पास करनी होगी परीक्षा
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 10 हजार शिक्षक अभी तक शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) उत्तीर्ण नहीं कर पाए हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या जेबीटी शिक्षकों की है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद शिक्षा विभाग ने ऐसे शिक्षकों का नया डाटा तैयार करने और उनकी श्रेणीवार सूची बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।पढ़ें पूरी ्खबर...
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हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 10 हजार शिक्षक अभी तक शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) उत्तीर्ण नहीं कर पाए हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या जेबीटी शिक्षकों की है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद शिक्षा विभाग ने ऐसे शिक्षकों का नया डाटा तैयार करने और उनकी श्रेणीवार सूची बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लगभग 6800 जेबीटी, 780 सीएंडवी तथा करीब 3000 टीजीटी, मुख्य शिक्षक (एचटी) और केंद्र मुख्य शिक्षक (सीएचटी) ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक टेट उत्तीर्ण नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुरूप इन शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टेट परीक्षा पास करनी होगी। शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में जिला उपनिदेशकों और संबंधित अधिकारियों से ताजा जानकारी मांगी है, ताकि वास्तविक संख्या और श्रेणीवार स्थिति स्पष्ट हो सके। शिक्षकों की बड़ी संख्या को देखते हुए शिक्षा विभाग ने स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला को वर्ष में कम से कम दो बार शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने को कहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी पात्र शिक्षक टेट उत्तीर्ण कर सकें और उनकी सेवाओं पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
निजी स्कूलों के शिक्षकों का नहीं है स्पष्ट रिकॉर्ड
-सरकारी स्कूलों के विपरीत निजी शिक्षण संस्थानों में बिना टेट उत्तीर्ण किए कार्यरत शिक्षकों की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। शिक्षा निदेशालय फिलहाल सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के रिकॉर्ड को एकत्र करने पर फोकस कर रहा है। हालांकि माना जा रहा है कि भविष्य में निजी स्कूलों में भी इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने के लिए अलग से जानकारी जुटाई जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी हलचल
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षा महकमे में हलचल तेज हो गई है। विभाग अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि निर्धारित अवधि के भीतर सभी शिक्षक आवश्यक योग्यता पूरी करें। इससे शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ राष्ट्रीय शिक्षक पात्रता मानकों का अनुपालन भी सुनिश्चित होगा।