{"_id":"61b61d7392c7782db131ee72","slug":"himachal-pradesh-sanyukt-kisan-manch-demand-for-msp","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिमला: संयुक्त किसान मंच का सवाल, कहां गए बागवानों को जारी किए 20 करोड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिमला: संयुक्त किसान मंच का सवाल, कहां गए बागवानों को जारी किए 20 करोड़
Sun, 12 Dec 2021 09:37 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 12 Dec 2021 09:37 PM IST
सार
संयुक्त किसान मंच का कहना है कि बागवानों के साथ लूट खसोट के लिए आढ़तियों के साथ एपीएमसी और सरकार बराबर के दोषी हैं। सीजन के दौरान एपीएमसी की मंडियों में बागवानों के साथ लूट की खुली छूट दी गई।
विज्ञापन
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
किसान बागवानों के हितों के लिए संघर्ष कर रहे संयुक्त किसान मंच ने जवाब दो सरकार अभियान में प्रदेश पूछा है कि बागवानों को एमआईएस का पैसा कब मिलेगा। विधानसभा में सरकार ने एमआईएस के पैसे का भुगतान करने के लिए 20 करोड़ जारी करने का दावा किया है। अगर यह पैसा जारी हुआ है तो बागवानों को क्यों नहीं मिला, सरकार इसका जवाब दे।
विज्ञापन
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने कहा है कि सरकार ने वादा किया था कि उप चुनावों के बाद बागवानों को एमआईएस के पैसे का भुगतान कर दिया जाएगा। उप चुनाव हुए एक महीने से अधिक का समय हो गया है बावजूद इसके एक भी बागवान को एमआईएस में खरीदे सेब का भुगतान नहीं हुआ। यह सरकार की कथनी और करनी में फर्क को जाहिर करता है।
विज्ञापन
संयुक्त किसान मंच का कहना है कि बागवानों के साथ लूट खसोट के लिए आढ़तियों के साथ एपीएमसी और सरकार बराबर के दोषी हैं। सीजन के दौरान एपीएमसी की मंडियों में बागवानों के साथ लूट की खुली छूट दी गई। रुमाल के नीचे बोलियां लगी, मनमाना लेबर चार्ज और छूट वसूली गई, बैंक डिमांड ड्राफ्ट के नाम पर कटौती और एपीएमसी के बैरियरों पर अवैध वसूली पर रोक नहीं लगाई गई।
विज्ञापन
सरकार ने विधानसभा में माना है कि एमआईएस मेंखरीदे सेब का 2013 से 2020 तक आठ सालों का करीब 671.29 लाख रुपये का भुगतान लंबित है। अपनी फसल का पैसा न मिलने के कारण बागवानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
एमएसपी लागू हो तो किसान बागवानों को मिलेगी राहत
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान का कहना है कि फलों, सब्जियों सहित अन्य फसलों पर एमएसपी ( न्यूनतम समर्थन मूल्य) की मांग इसी लिए की जा रही है, ताकि किसान बागवानों को उनकी उपज की कीमत के लिए सालों इंतजार न करना पड़े।