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शिमला: हिमाचल पुलिस की स्कूल कनेक्ट पहल शुरू, बच्चों की सुरक्षा और निगरानी होगी मजबूत

Mon, 02 Nov 2026 04:08 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 02 Nov 2026 04:08 PM IST
सार

शिमला स्थित पुलिस मुख्यालय में डीजीपी अशोक तिवारी ने 27 स्कूलों के प्रधानाचार्यों और प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की। इस पहल के जरिये पुलिस अब स्कूलों के साथ भी सीधे तौर पर जुड़ रही है। 

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Himachal Pradesh Police launches 'School Connect' initiative for children's safety
हिमाचल पुलिस की स्कूल कनेक्ट पहल शुरू। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा का दायरा मजबूत करने के लिए हिमाचल पुलिस ने स्कूल कनेक्ट मुहिम शुरू की है। पुलिस-विश्वविद्यालय कनेक्ट की तर्ज पर शुरू किए गए इस अभियान के तहत अब पुलिस स्कूलों के साथ मिलकर सुरक्षा की निगरानी करेगी। इसके जरिये विद्यार्थियों को नशे, साइबर बुलिंग और नए दौर के अपराधों के प्रति जागरूक किया जाएगा। शिमला से शुरू हुआ यह अभियान अब प्रदेश के सभी जिलों में चलाया जाएगा।

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निवारक पुलिसिंग और जन कल्याण पर जोर
पुलिस मुख्यालय शिमला में पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में 27 स्कूलों के प्रधानाचार्यों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जरूरी मानक तय किए गए। डीजीपी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, इसमें स्कूल प्रबंधन, अभिभावकों और समाज की भी बराबर भूमिका है। निवारक पुलिसिंग के तहत अपराध होने के बाद कार्रवाई के बजाय संभावित खतरों को पहले ही रोका जाएगा।

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सतर्कता, जागरूकता और आपसी तालमेल से घटनाओं को रोकना मकसद: डीजीपी
अभियान के तहत स्कूल परिसरों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था, प्रवेश-निकास द्वारों पर निगरानी और प्रत्येक आगंतुक का सत्यापन अनिवार्य होगा। स्कूल कर्मचारियों और वाहन चालकों का पुलिस सत्यापन कराने के साथ बसों की फिटनेस जांची जाएगी। बच्चों को साइबर बुलिंग, सेक्सटॉर्शन, डीपफेक और पॉक्सो अधिनियम के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री के एंटी चिट्टा अभियान में भी छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित होगी। आपात स्थिति से निपटने के लिए स्कूलों में मॉक ड्रिल होंगी और छात्रों को हेल्पलाइन नंबर 112 की जानकारी दी जाएगी। बेहतर समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त होंगे और स्कूल सुरक्षा समितियां बनाई जाएंगी।
 

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बैठक में  इन उपायों पर हुई चर्चा
कैंपस सुरक्षा: सीसीटीवी निगरानी, आगंतुकों का सत्यापन, एक्सेस कंट्रोल और नियमित सुरक्षा समीक्षा। 
बच्चों की सुरक्षा: अपहरण, यौन शोषण, बुलिंग, उत्पीड़न और शोषण को रोकना। साथ ही पाॅक्सों कानून के बारे में जागरूकता फैलाना और घटनाओं की तुरंत रिपोर्ट करना। 
साइबर सुरक्षा: साइबर बुलिंग, ऑनलाइन ग्रूमिंग, यौन शोषण के जरिये जबरन वसूली, डीपफेक और अन्य डिजिटल खतरों से बचाव। 
चिट्टा/नशीले पदार्थों की रोकथाम: छात्रों को चिट्टा और अन्य नशीले पदार्थों से बचाना। इसके लिए जागरूकता फैलाना और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाले एंटी चिट्टा जन आंदोलन में भागीदारी सुनिश्चित करना।
परिवहन और आपातकालीन सुरक्षा: स्टाफ और ड्राइवरों का सत्यापन, स्कूल बसों की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन की तैयारी, सुरक्षित निकासी अभ्यास और आपातकालीन सेवा 112 के बारे में जागरूकता।
 पुलिस-स्कूल समन्वय: नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, स्कूल सुरक्षा समितियों का गठन और स्थानीय पुलिस के साथ नियमित संवाद। 

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