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हिमाचल: औद्योगिक नीति की मियाद खत्म, 30 हजार उद्योगों की सब्सिडी पर संकट; पुरानी रियायतें जारी रहने पर असमंजस

Wed, 21 Oct 2026 09:58 AM IST
Ankesh Dogra धर्मेंद्र पंडित, शिमला।
धर्मेंद्र पंडित, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Wed, 21 Oct 2026 09:58 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक नीति की अवधि समाप्त होने से करीब 30 हजार छोटे-बड़े उद्योगों के सामने सब्सिडी और प्रोत्साहन राशि को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। बिजली, ट्रांसपोर्ट और ऋण ब्याज पर मिलने वाली रियायतों के भविष्य को लेकर उद्योगपति चिंतित हैं। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने जल्द नई नीति लाने के लिए अधिकारियों के साथ बैठक करने की बात कही है।

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Himachal Pradesh Industrial Policy Expiry Subsidy Crisis 2026
हिमाचल में औद्योगिक नीति खत्म - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक नीति की अवधि समाप्त होने के बाद उद्योगपतियों को मिलने वाली सब्सिडी और विभिन्न रियायतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए लागू औद्योगिक नीति की अवधि 11 अक्तूबर को समाप्त हो चुकी है, लेकिन नई नीति अभी तक सरकार के स्तर पर लंबित है। ऐसे में बिजली, ट्रांसपोर्ट और ऋण के ब्याज पर मिलने वाली रियायतों के भविष्य को लेकर उद्योग जगत की चिंता बढ़ गई है।

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प्रदेश में करीब 30 हजार छोटे-बड़े उद्योग संचालित हो रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे उद्योग हैं, जिनके लिए सरकारी रियायतें उत्पादन लागत कम रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। औद्योगिक नीति के तहत मिलने वाली सुविधाओं का उद्देश्य प्रदेश में निवेश को प्रोत्साहित करना, मौजूदा उद्योगों को टिकाए रखना और उद्योगों को दूसरे राज्यों में पलायन करने से रोकना था। अब नीति की अवधि समाप्त होने से उद्योगपतियों को आशंका है कि उत्पादन लागत बढ़ सकती है और निवेश संबंधी योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

2019 में लागू हुई थी औद्योगिक नीति
हिमाचल प्रदेश सरकार ने उद्योगों को राहत देने और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 16 अगस्त, 2019 को औद्योगिक नीति लागू की थी। इसकी मूल अवधि 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हो गई थी। इसके बाद मार्च 2026 में नीति को विस्तार दिया गया। फिर 10 अगस्त से 11 अक्तूबर तक इसकी अवधि बढ़ाई गई थी। अब यह समय सीमा भी पूरी हो चुकी है, लेकिन नई औद्योगिक नीति को अंतिम रूप देकर लागू नहीं किया जा सका है।
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करीब 100 उद्योगपतियों ने घटाया उत्पादन
प्रदेश में करीब 100 उद्योगपतियों की ओर से उत्पादन कम किए जाने की जानकारी सामने आई है। औद्योगिक प्रोत्साहन व्यवस्था को लेकर बनी अनिश्चितता उद्योग क्षेत्र के लिए चुनौती बन सकती है। बिजली और परिवहन पर मिलने वाली रियायतों से उद्योगों को उत्पादन और माल की ढुलाई की लागत कम रखने में मदद मिलती है। वहीं, ऋण पर मिलने वाले प्रोत्साहन उद्योगों के विस्तार और नई इकाइयां स्थापित करने में सहायक होते हैं।

नई नीति में देरी के कारण उद्योगपति भविष्य की योजनाओं को लेकर असमंजस में हैं। उद्योग जगत का मानना है कि स्पष्ट नीति के अभाव में नए निवेशकों को आकर्षित करना और मौजूदा इकाइयों को विस्तार के लिए प्रोत्साहित करना मुश्किल हो सकता है।
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जल्द नई औद्योगिक नीति लाएगी सरकार : हर्षवर्धन चौहान
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक नीति की वैधता समाप्त हो गई है। उद्योगपतियों को राहत देने के लिए सरकार जल्द नई औद्योगिक नीति लाने जा रही है। इसे लेकर विभागीय अधिकारियों के साथ जल्द बैठक की जाएगी।

पुरानी रियायतें जारी रहने पर असमंजस
बीबीएनआईए के मुख्य सलाहकार शैलेष अग्रवाल ने कहा कि पुरानी नीति के तहत स्थानीय निवेश पर सीजीएसटी से संबंधित कैशबैक और बिजली शुल्क में छूट जैसे प्रावधान थे। अब नई नीति लागू नहीं होने से उद्योगपति असमंजस में हैं कि उन्हें इन सुविधाओं का लाभ आगे भी मिलेगा या नहीं। उन्होंने कहा कि स्पष्ट औद्योगिक नीति नहीं होने पर नए निवेशकों को आकर्षित करना मुश्किल होगा।

उद्योगपतियों ने जल्द नीति घोषित करने की उठाई मांग
बीबीएन उद्योग संघ के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र गुलेरिया ने सरकार से जल्द नई औद्योगिक नीति घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत नई नीति का इंतजार कर रहा है। सरकार को उद्योगों के अनुकूल नीति बनानी चाहिए, जिससे नए निवेशक हिमाचल का रुख करें और मौजूदा उद्योग अपनी इकाइयों का विस्तार कर सकें।

बीबीएनआईए के महासचिव रजनीश विज ने बताया कि संघ ने सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि नई नीति लागू होने तक पुरानी नीति को मान्य रखा जाए। उनके अनुसार, स्पष्ट औद्योगिक नीति के बिना उद्योगों का विस्तार और नए निवेश को आकर्षित करना मुश्किल है।

2003 की तर्ज पर नीति बनाने की मांग
बीबीएनआईए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुकेश जैन ने कहा कि किसी भी औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए स्पष्ट और प्रभावी नीति जरूरी है। उन्होंने सरकार से 2003 की तर्ज पर नई औद्योगिक नीति लाने की मांग की, ताकि प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिले, नए उद्योग स्थापित हों और सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी हो सके।

उद्योग जगत की मांग है कि सरकार जल्द नई औद्योगिक नीति लागू करे या तब तक पुरानी नीति के तहत मिलने वाली सुविधाओं को जारी रखने के संबंध में स्पष्ट निर्णय ले। इससे उद्योगपतियों की अनिश्चितता कम करने और हिमाचल प्रदेश में निवेश का माहौल बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
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