{"_id":"6ad76835a9c245d6130331ad","slug":"tax-not-paid-on-building-construction-now-14-years-tax-will-have-to-be-paid-together-shimla-news-c-19-sml1002-807115-2026-10-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: भवन बनाए पर नहीं भरा टैक्स, अब एकसाथ देना होगा 14 साल का कर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: भवन बनाए पर नहीं भरा टैक्स, अब एकसाथ देना होगा 14 साल का कर
विज्ञापन
अमर उजाला एक्सक्लूसिव
राजधानी में सैकड़ों भवन मालिकों को 2013 से 2026 तक के टैक्स बिल जारी, ब्याज सहित होगी वसूली
बिल मिलते ही निगम कार्यालय पहुंचे भवन मालिक
सुनवाई के लिए निगम ने बनाई कमेटी, देना होगा रिकॉर्ड
अशोक चौहान
शिमला। राजधानी में भवन बनाने के बाद प्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं करवाने वाले सैकड़ों भवन मालिकों को नगर निगम ने एक साथ 14 साल के बिल थमा दिए हैं। यह बिल वर्ष 2013 से 2026 तक के हैं। पहली बार एक साथ भारी-भरकम टैक्स बिल मिलने से भवन मालिक हैरान हैं।
ज्यादातर भवन मालिकों को 10 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक के टैक्स बिल जारी किए गए हैं। बिल मिलते ही कई भवन मालिक नगर निगम कार्यालय पहुंच गए। उनका कहना है कि निगम ने उन्हें गलत बिल जारी किए हैं। भवन मालिकों का तर्क है कि उन्होंने भले ही आज तक टैक्स जमा नहीं करवाया है, लेकिन उनके अनुसार टैक्स की राशि कम बनती है। नगर निगम ने इनसे लिखित आपत्तियां मांगी हैं। अब तक 40 से ज्यादा भवन मालिक निगम की ओर से जारी बिलों के खिलाफ लिखित आपत्तियां दर्ज करवा चुके हैं। नगर निगम ने इन आपत्तियों की सुनवाई अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा की अगुवाई वाली टैक्स कमेटी के माध्यम से करने का फैसला लिया है। इस कमेटी में अतिरिक्त आयुक्त के अलावा नगर निगम के दो निर्वाचित पार्षद शामिल हैं। कमेटी आपत्तियों की सुनवाई के लिए भवन मालिकों को बुलाने जा रही है। अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने कहा कि भवन मालिकों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। पुख्ता रिकॉर्ड पेश करने और उसके सत्यापन के बाद ही संशोधित बिल जारी किए जाएंगे।
सर्वे में खुलासा, चार हजार ने नहीं दिया टैक्स
नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, शहर में करीब चार हजार ऐसे भवन मालिक सामने आए हैं, जिन्होंने आज तक कभी भी प्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं करवाया है। इनका रिकॉर्ड न तो नगर निगम में दर्ज है और न ही इन्होंने कभी खुद इसकी जानकारी दी। ऐसे भवन मालिकों को पहली बार टैक्स के बिल जारी किए जा रहे हैं। नगर निगम के अनुसार, शिमला शहर में वर्ष 2013 से भवन मालिकों से प्रॉपर्टी टैक्स वसूला जा रहा है। सर्वे में सामने आए नए भवनों से भी वर्ष 2013 से टैक्स वसूली की जाएगी। यह वसूली ब्याज सहित होगी। यदि किसी व्यक्ति का भवन वर्ष 2015 या उसके बाद बना है, तो उसे सुनवाई के दौरान संबंधित रिकॉर्ड पेश करना होगा। इसमें बताना होगा कि भवन कब तैयार हुआ और टैक्स शाखा में उसका पंजीकरण क्यों नहीं करवाया गया। रिकॉर्ड पेश करने के बाद नगर निगम संशोधित बिल जारी करेगा।
विज्ञापन
शहर में यह है टैक्स व्यवस्था
शहर में नया भवन बनने के बाद भवन मालिक को नगर निगम की टैक्स शाखा में जाकर सेल्फ असेसमेंट फॉर्म भरना पड़ता है। इस फॉर्म में वार्ड का नाम, कोर या नॉन-कोर एरिया, मकान कच्चा है या पक्का, उसका आकार और इस्तेमाल संबंधी जानकारी देनी होती है। नगर निगम इसी जानकारी के आधार पर टैक्स के बिल जारी करता है। निगम की ओर से मौके पर जाकर भवन का असेसमेंट नहीं किया जाता। निगम का कहना है कि टैक्स शाखा में असेसमेंट संबंधी जानकारी देना भवन मालिक की जिम्मेदारी है। अब निगम के पास कई ऐसे लोग भी पहुंचे हैं, जिनका कहना है कि उन्हें इस व्यवस्था की जानकारी नहीं थी जिसके चलते उन्होंने टैक्स जमा नहीं करवाया। कुछ भवन मालिकों का कहना है कि उनका मकान हाल ही में तैयार हुआ है, जबकि निगम उनसे पिछले 14 वर्षों का टैक्स वसूल रहा है। ऐसे में अब सुनवाई के बाद ही बिलों पर अंतिम फैसला होगा।
आंकड़ों में समझें
32 हजार भवन वर्ष 2025 तक नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज थे।
4 हजार नए भवन सर्वे में मिले जिससे कुल भवनों की संख्या करीब 36 हजार हो गई।
20 हजार भवन मालिकों को चालू वित्त वर्ष के बिल जारी किए जा चुके हैं।
16 हजार भवन मालिकों को 15 नवंबर तक बिल जारी करने का लक्ष्य है।
30 करोड़ रुपये की कमाई नगर निगम को इस साल प्रॉपर्टी टैक्स से होने का अनुमान है।
विज्ञापन
राजधानी में सैकड़ों भवन मालिकों को 2013 से 2026 तक के टैक्स बिल जारी, ब्याज सहित होगी वसूली
बिल मिलते ही निगम कार्यालय पहुंचे भवन मालिक
सुनवाई के लिए निगम ने बनाई कमेटी, देना होगा रिकॉर्ड
अशोक चौहान
शिमला। राजधानी में भवन बनाने के बाद प्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं करवाने वाले सैकड़ों भवन मालिकों को नगर निगम ने एक साथ 14 साल के बिल थमा दिए हैं। यह बिल वर्ष 2013 से 2026 तक के हैं। पहली बार एक साथ भारी-भरकम टैक्स बिल मिलने से भवन मालिक हैरान हैं।
ज्यादातर भवन मालिकों को 10 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक के टैक्स बिल जारी किए गए हैं। बिल मिलते ही कई भवन मालिक नगर निगम कार्यालय पहुंच गए। उनका कहना है कि निगम ने उन्हें गलत बिल जारी किए हैं। भवन मालिकों का तर्क है कि उन्होंने भले ही आज तक टैक्स जमा नहीं करवाया है, लेकिन उनके अनुसार टैक्स की राशि कम बनती है। नगर निगम ने इनसे लिखित आपत्तियां मांगी हैं। अब तक 40 से ज्यादा भवन मालिक निगम की ओर से जारी बिलों के खिलाफ लिखित आपत्तियां दर्ज करवा चुके हैं। नगर निगम ने इन आपत्तियों की सुनवाई अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा की अगुवाई वाली टैक्स कमेटी के माध्यम से करने का फैसला लिया है। इस कमेटी में अतिरिक्त आयुक्त के अलावा नगर निगम के दो निर्वाचित पार्षद शामिल हैं। कमेटी आपत्तियों की सुनवाई के लिए भवन मालिकों को बुलाने जा रही है। अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने कहा कि भवन मालिकों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। पुख्ता रिकॉर्ड पेश करने और उसके सत्यापन के बाद ही संशोधित बिल जारी किए जाएंगे।
विज्ञापन
सर्वे में खुलासा, चार हजार ने नहीं दिया टैक्स
नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, शहर में करीब चार हजार ऐसे भवन मालिक सामने आए हैं, जिन्होंने आज तक कभी भी प्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं करवाया है। इनका रिकॉर्ड न तो नगर निगम में दर्ज है और न ही इन्होंने कभी खुद इसकी जानकारी दी। ऐसे भवन मालिकों को पहली बार टैक्स के बिल जारी किए जा रहे हैं। नगर निगम के अनुसार, शिमला शहर में वर्ष 2013 से भवन मालिकों से प्रॉपर्टी टैक्स वसूला जा रहा है। सर्वे में सामने आए नए भवनों से भी वर्ष 2013 से टैक्स वसूली की जाएगी। यह वसूली ब्याज सहित होगी। यदि किसी व्यक्ति का भवन वर्ष 2015 या उसके बाद बना है, तो उसे सुनवाई के दौरान संबंधित रिकॉर्ड पेश करना होगा। इसमें बताना होगा कि भवन कब तैयार हुआ और टैक्स शाखा में उसका पंजीकरण क्यों नहीं करवाया गया। रिकॉर्ड पेश करने के बाद नगर निगम संशोधित बिल जारी करेगा।
विज्ञापन
शहर में यह है टैक्स व्यवस्था
शहर में नया भवन बनने के बाद भवन मालिक को नगर निगम की टैक्स शाखा में जाकर सेल्फ असेसमेंट फॉर्म भरना पड़ता है। इस फॉर्म में वार्ड का नाम, कोर या नॉन-कोर एरिया, मकान कच्चा है या पक्का, उसका आकार और इस्तेमाल संबंधी जानकारी देनी होती है। नगर निगम इसी जानकारी के आधार पर टैक्स के बिल जारी करता है। निगम की ओर से मौके पर जाकर भवन का असेसमेंट नहीं किया जाता। निगम का कहना है कि टैक्स शाखा में असेसमेंट संबंधी जानकारी देना भवन मालिक की जिम्मेदारी है। अब निगम के पास कई ऐसे लोग भी पहुंचे हैं, जिनका कहना है कि उन्हें इस व्यवस्था की जानकारी नहीं थी जिसके चलते उन्होंने टैक्स जमा नहीं करवाया। कुछ भवन मालिकों का कहना है कि उनका मकान हाल ही में तैयार हुआ है, जबकि निगम उनसे पिछले 14 वर्षों का टैक्स वसूल रहा है। ऐसे में अब सुनवाई के बाद ही बिलों पर अंतिम फैसला होगा।
आंकड़ों में समझें
32 हजार भवन वर्ष 2025 तक नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज थे।
4 हजार नए भवन सर्वे में मिले जिससे कुल भवनों की संख्या करीब 36 हजार हो गई।
20 हजार भवन मालिकों को चालू वित्त वर्ष के बिल जारी किए जा चुके हैं।
16 हजार भवन मालिकों को 15 नवंबर तक बिल जारी करने का लक्ष्य है।
30 करोड़ रुपये की कमाई नगर निगम को इस साल प्रॉपर्टी टैक्स से होने का अनुमान है।