पहले जारी कर दिए 27 नोटिस, अब बोले- हम कार्रवाई को अधिकृत नहीं
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली एक बार फिर से विवादों में आ गई है। फोरलेन निर्माण के दौरान मक डंपिंग से हुए वायु, ध्वनी और जल प्रदूषण मामलों में निर्माण कंपनी को 27 नोटिस जारी करने वाले बोर्ड ने अब कहा है कि यह मामले उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। इससे बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। दरअसल फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बिलासपुर से फोरलेन निर्माण से होने वाले प्रदूषण पर कार्रवाई संबंधी सूचना मांगी थी।
आरटीआई के तहत जवाब दिया गया कि निर्माण कंपनी को प्रदूषण मामलों में 27 नोटिस भेजे गए हैं। समिति महा सचिव एवं पूर्व सैनिक मदन लाल शर्मा, उप प्रधान राकेश कुमार, जगदीश राम, सीता राम, बलदेव, चिंता देवी आदि ने बताया की निर्माण के दौरान की गई अवैध डंपिंग, ब्लास्टिंग से पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पूछा था की इस मामले पर क्या कार्रवाई की गई।
बिलासपुर कार्यालय से लिखित में बताया गया कि निर्माण कंपनी को 27 नोटिस भेजे गए है। जब पूछा क्या की नोटिस के बाद क्या कार्रवाई की गई तो कार्यालय ने इस बाबत जानकारी होने से मना कर दिया। जिसके बाद समिति ने प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील की।
जब 27 नोटिस जारी करने वाले अधिकारी को सुनवाई के दौरान बुलाया गया तो अधिकारी ने जवाब दिया कि यह उनके अधिकारक्षेत्र में नहीं आता। यह कार्य देखना राजस्व, वन और एनएचएआई के अधीन है।
प्रथम अपीलीय अधिकारी एसईई प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड शिमला अजीत कुमार ने भी इसे सही ठहराते हुए अपना फैसला सुनाया है। समिति का आरोप है कि अगर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस पर कार्रवाई करने के लिए अधिकृत नहीं था तो फिर दर्जनों नोटिस किस आधार पर जारी किए गए। समिति सदस्यों ने अब इस मामले को उच्चाधिकारियों के समक्ष लाने का मन बनाया है।
पहले से जांच के घेरे में हैं अधिकारी
बिलासपुर के उक्त अधिकारी पर पहले भी विभिन्न उद्योगों, होटलों, हॉट मिक्स प्लांट सहित अन्य संस्थानों के सैकड़ों निरीक्षण करने के बाद रिपोर्ट तैयार न करने के मामले जांच चली हुई है।