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पुलिस ने 48 ईआरएसएस कर्मचारियों की सेवाएं कीं खत्म
Wed, 03 Jul 2019 12:58 PM IST
अरविन्द ठाकुर
प्रवीण कुमार, अमर उजाला, हमीरपुर
प्रवीण कुमार, अमर उजाला, हमीरपुर
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Wed, 03 Jul 2019 12:58 PM IST
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प्रदेश पुलिस विभाग ने सूबे में तैनात 48 इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम (ईआरएसएस) कर्मचारियों की सेवाएं खत्म करने के आदेश दिए हैं। पुलिस विभाग ने प्रदेश सरकार से बजट न मिलने पर उक्त आदेश दिए हैं। नवंबर 2018 में तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मंडी में ईआरएसएस-112 का शुभारंभ करते हुए कहा था कि हिमाचल देश का पहला राज्य है, जहां पर यह सेवा शुरू हुई है।
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वर्तमान में प्रदेश में ईआरएसएस का काम एक निजी कंपनी के पास है। शिमला पुलिस मुख्यालय के अलावा कंपनी ने त्वरित सेवाएं मुहैया करवाने के लिए हर जिला मुख्यालय पर ईआरएसएस कॉल सेंटर स्थापित किए। जिला स्तर पर स्थापित प्रत्येक कॉल सेंटर (डीसीसी) पर तीन कर्मी तीन शिफ्टों में 24 घंटे सेवाएं देते हैं। पुलिस, अग्निशमन और स्वास्थ्य सेवाएं तीनों के लिए पूर्व में अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर थे, लेकिन ईआरएसएस से दुर्घटना, हत्या, चोरी, डकैती, मारपीट, महिला हेल्पलाइन, दुष्कर्म या छेड़छाड़, अग्निकांड और स्वास्थ्य के मामलों की शिकायत के लिए प्रदेश में 112 इमरजेंसी नंबर स्थापित किया गया।
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इसके साथ ही हर जिले में एक जीपीएस सिस्टम से लैस वाहन भी दिया गया। शिकायत मिलने के बाद ईआरएसएस कॉल सेंटर से निकटतम पुलिस थाने या चौकी पर सूचना दी जाती है। इसके बाद पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंचती है, लेकिन अब बजट के अभाव में सूबे में जिला स्तर पर स्थापित सभी डिस्ट्रिक्ट कमांड सेंटर (डीसीसी) को तत्काल बंद करने के फरमान जारी कर दिए हैं।
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अब केवल शिमला से ही चलेंगी सेवाएं
जिला स्तर पर सभी सेंटर बंद होने से जहां 48 कर्मियों को रोजगार का संकट पैदा हो गया है, वहीं प्रदेश मुख्यालय में स्थापित सेंटर पर काम का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। पुलिस, आग और स्वास्थ्य संबंधित सारी फोन कॉल पहले शिमला में प्राप्त होंगी, उसके बाद यह जिला स्तर पर संबंधित पुलिस थानों को ट्रांसफर होंगी।