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हिमाचल: सीएम सुक्खू ने किया पेंशनरों को एरियर पर बड़ा एलान, क्लास-3 को 30 और क्लास-1 व 2 को 15 फीसदी भुगतान
Mon, 21 Sep 2026 02:52 PM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 21 Sep 2026 02:52 PM IST
सार
शिमला में पेंशनरों के साथ बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने संशोधित वेतनमान के लंबित एरियर को लेकर भुगतान की घोषणा की। मुख्यमंत्री के अनुसार क्लास-3 पेंशनरों को 30 प्रतिशत और क्लास-1 व क्लास-2 के पेंशनरों को 15-15 प्रतिशत एरियर दिया जाएगा। बैठक में लंबित चिकित्सा बिलों का मुद्दा भी उठा। मुख्यमंत्री ने विभागों को इन बिलों के भुगतान के लिए समय पर बजट की मांग भेजने के निर्देश दिए।
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मुख्यमंत्री सुक्खू ने पेंशनरों के लिए की बड़ी घोषणा।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में पेंशनरों के लंबित एरियर के भुगतान को लेकर सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि 1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए क्लास-III पेंशनरों को उनके पेंशन एरियर का 30 प्रतिशत और क्लास-I व क्लास-II पेंशनरों को 15 प्रतिशत एरियर अक्तूबर में दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार पेंशनरों की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है और डीए की एक और किस्त जारी करने पर भी विचार किया जा रहा है।
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चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लंबित दावों का भुगतान करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभागों को पेंशनरों के लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों का भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं। 65 वर्ष से अधिक आयु के सभी पेंशनरों का एरियर सरकार पहले ही जारी कर चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार समय-समय पर कर्मचारियों और पेंशनरों को वित्तीय लाभ जारी करती रही है। पेंशनरों ने प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और हिमाचल की प्रगति में योगदान दिया है।
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सुक्खू ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने कर्मचारियों के हित में बिना किसी राजनीतिक उद्देश्य के पुरानी पेंशन योजना बहाल की, ताकि कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन जी सकें। उन्होंने पेंशनरों की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
पिछली सरकार पर 10 हजार करोड़ की देनदारियां छोड़ने का आरोप
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार के सत्ता संभालने के समय प्रदेश पर 76,000 करोड़ रुपये का कर्ज था। इसके अलावा कर्मचारियों और पेंशनरों से संबंधित करीब 10,000 करोड़ रुपये की देनदारियां थीं। उन्होंने कहा कि हिमाचल को वर्ष 1952 से राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) मिलता रहा है, लेकिन 16वें वित्त आयोग ने 77 वर्षों से मिल रहे इस अधिकार को बंद कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आरडीजी केवल सरकार का अधिकार नहीं, बल्कि हिमाचल की जनता का अधिकार है।
पिछली सरकार पर 10 हजार करोड़ की देनदारियां छोड़ने का आरोप
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार के सत्ता संभालने के समय प्रदेश पर 76,000 करोड़ रुपये का कर्ज था। इसके अलावा कर्मचारियों और पेंशनरों से संबंधित करीब 10,000 करोड़ रुपये की देनदारियां थीं। उन्होंने कहा कि हिमाचल को वर्ष 1952 से राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) मिलता रहा है, लेकिन 16वें वित्त आयोग ने 77 वर्षों से मिल रहे इस अधिकार को बंद कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आरडीजी केवल सरकार का अधिकार नहीं, बल्कि हिमाचल की जनता का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि यदि एक लाख रुपये की वार्षिक आय में से 40 हजार रुपये काट लिए जाएं तो परिवार की आर्थिक स्थिति पर क्या असर पड़ेगा। हिमाचल भी इसी स्थिति का सामना कर रहा है और प्रदेश को हर साल 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
सुक्खू ने आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में 54,000 करोड़ रुपये आरडीजी और 16,000 करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजे के रूप में प्राप्त किए। अगर उस दौरान वित्तीय अनुशासन बनाए रखा गया होता तो प्रदेश का कर्ज करीब 30,000 करोड़ रुपये कम किया जा सकता था और कर्मचारियों से जुड़ी देनदारियां भी चुकाई जा सकती थीं।
उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने प्रदेश में करीब 1,000 करोड़ रुपये की लागत से भवनों का निर्माण करवाया, जिनमें से कई वर्तमान में खाली पड़े हैं। इसके विपरीत वर्तमान सरकार को पिछले तीन वर्षों में 17,000 करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में प्राप्त हुए हैं और सरकार वित्तीय अनुशासन के साथ आगे बढ़ रही है।
सुक्खू ने आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में 54,000 करोड़ रुपये आरडीजी और 16,000 करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजे के रूप में प्राप्त किए। अगर उस दौरान वित्तीय अनुशासन बनाए रखा गया होता तो प्रदेश का कर्ज करीब 30,000 करोड़ रुपये कम किया जा सकता था और कर्मचारियों से जुड़ी देनदारियां भी चुकाई जा सकती थीं।
उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने प्रदेश में करीब 1,000 करोड़ रुपये की लागत से भवनों का निर्माण करवाया, जिनमें से कई वर्तमान में खाली पड़े हैं। इसके विपरीत वर्तमान सरकार को पिछले तीन वर्षों में 17,000 करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में प्राप्त हुए हैं और सरकार वित्तीय अनुशासन के साथ आगे बढ़ रही है।
सरकार का दावा- हर फैसला वित्तीय मजबूती और आत्मनिर्भरता के लिए
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रत्येक निर्णय का उद्देश्य हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाना और प्रदेश की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना है। पेंशनरों के एरियर भुगतान, चिकित्सा प्रतिपूर्ति और कर्मचारियों-पेंशनरों को वित्तीय लाभ देने की प्रक्रिया इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।
बैठक में हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट के अध्यक्ष आत्मा राम शर्मा ने सरकार की ओर से पेंशनरों के हित में उठाए गए कदमों के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। बैठक में ज्वाइंट फ्रंट के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में पेंशनर मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रत्येक निर्णय का उद्देश्य हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाना और प्रदेश की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना है। पेंशनरों के एरियर भुगतान, चिकित्सा प्रतिपूर्ति और कर्मचारियों-पेंशनरों को वित्तीय लाभ देने की प्रक्रिया इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।
बैठक में हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट के अध्यक्ष आत्मा राम शर्मा ने सरकार की ओर से पेंशनरों के हित में उठाए गए कदमों के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। बैठक में ज्वाइंट फ्रंट के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में पेंशनर मौजूद रहे।