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हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: कर्जदार ने नहीं चुकाया लोन तो गारंटर की संपत्ति होगी नीलाम

Mon, 21 Sep 2026 07:27 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 21 Sep 2026 07:27 PM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने लोन डिफॉल्ट से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने कहा कि चूंकि मामला सार्वजनिक धन से जुड़ा है और 2019 की डिक्री को किसी भी ऊपरी अदालत में चुनौती नहीं दी गई थी। 

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Major ruling by Himachal High Court: Guarantor's property to be auctioned if borrower fails to repay loan.
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने लोन डिफॉल्ट से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने कहा कि चूंकि मामला सार्वजनिक धन से जुड़ा है और 2019 की डिक्री को किसी भी ऊपरी अदालत में चुनौती नहीं दी गई थी। ऐसे में मूल कर्जदार ऋण नहीं चुकाता तो बैंक कर्ज की वसूली के लिए सीधे गारंटर की संपत्ति नीलाम कर सकता है। न्यायाधीश रोमेश वर्मा की अदालत ने स्पष्ट किया कि गारंटर यह शर्त नहीं रख सकता कि बैंक पहले मूल कर्जदार के खिलाफ कार्रवाई करे। बैंक से लोन लेते समय गारंटी देने वाले व्यक्ति की देनदारी मुख्य कर्जदार के समान होती है।

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कोर्ट ने कहा कि बैंक या ऋणदाता इस बात के लिए बाध्य नहीं है कि वह गारंटर के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले मुख्य कर्जदार से वसूली के सभी उपाय खत्म करे। यह पूरी तरह से बैंक (डिक्री-धारक) का विवेक है कि वह किससे पहले वसूली करना चाहता है। अदालत ने याचिकाकर्ता (गारंटरों) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने निचली अदालत की ओर से उनकी संपत्ति की नीलामी के आदेश को चुनौती दी थी। गौरतलब है कि कांगड़ा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक ने साल 2009 में मेसर्स अखिल स्टील ट्रेडर्स को 10 लाख रुपये का कैश क्रेडिट लोन दिया था।

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इस लोन के लिए विनोद कुमार और नरेश कुमार (याचिकाकर्ता) ने गारंटर के रूप में गारंटी डीड निष्पादित की थी। कर्जदार की ओर से भुगतान न करने पर बैंक ने 2012 में 10.99 लाख रुपये की वसूली के लिए सिविल कोर्ट, नादौन (हमीरपुर) में मुकदमा दायर किया। 2019 में अदालत ने तीनों देनदारों को संयुक्त रूप से और अलग-अलग यह राशि 12.50 प्रतिशत ब्याज के साथ चुकाने का आदेश दिया। निचली अदालत के फैसले को किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी गई, जिससे वह फैसला अंतिम हो गया। इसके बाद निष्पादन कार्यवाही के दौरान वरिष्ठ सिविल जज नादौन ने 28 मार्च 2026 को गारंटी देने वालों की संपत्ति बेचकर बैंक की बकाया राशि वसूलने के लिए कलेक्टर को वारंट जारी करने का आदेश दिया। इसी आदेश को गारंटरों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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