हिमाचल में स्वास्थ्य सेवाएं सुधारने को चाहिए 1160 करोड़
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स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने अपने तीन दिवसीय नई दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों को मजबूत बनाने और चिकित्सा सेवाओं में सुधार के लिए 1160 करोड़ रुपये प्रदान करने का आग्रह किया। स्वास्थ्य मंत्री ने प्रदेश में सात अन्य ट्रॉमा केंद्र स्थापित करने के लिए तीन करोड़ रुपये की राशि की प्रत्येक केंद्र के लिए मंजूरी देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्य होने के कारण सड़क दुर्घटना से राज्य में मृत्यु दर अधिक है।
उन्होंने कहा कि रामपुर ट्रॉमा सेंटर के लिए भी चार करोड़ रुपये की आवश्यकता है। उन्होंने तीन जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेजों में परिवर्तित करने और मौजूदा आईजीएमसी शिमला को मजबूत बनाने के लिए 800 करोड़ रुपये की मांग की और कहा कि राज्य में विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों को भी 295 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान की आवश्यकता है। उन्होंने राज्य के लोगों के लिए मुफ्त डायग्नोस्टिक सेवाएं सुविधा प्रदान करने के लिए 200 करोड़ रुपये के बजट की भी मांग की।
हिमाचल भारत की 70 प्रतिशत जेनेरिक दवाइयों का उत्पादन कर रहा
परमार ने कहा कि प्रदेश भारत की 70 प्रतिशत जेनेरिक दवाइयों का उत्पादन कर रहा है और बद्दी में ड्रग जांच लैब स्थापित करने के लिए 15 करोड़ रुपये की पहले से ही स्वीकृति मिल चुकी है। हालांकि, लैब स्थापित करने के लिए अतिरिक्त 15 करोड़ रुपये के बजट की जरूरत है।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री को अवगत करवाया कि कंडाघाट की मिलावट जांच लैब को भी एफएसएसएआई के वर्तमान मानकों को पूरा करने के लिए 10 करोड़ रुपये के अनुदान की आवश्यकता है।
उन्होंने डॉ. हर्षवर्धन को अवगत करवाया कि राज्य में भारत सरकार का राष्ट्रीय एंबुलेंस सेवा (एनएएस)-108 के तहत संचालित की जा रही कुल 198 एंबुलेंस में से 143 एंबुलेंसों की परिचालन लागत वहन कर रही है।
प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थिति के कारण एंबुलेंस की तादाद कम नहीं की जा सकती अथवा उन्होंने अन्य 55 एंबुलेंसों के संचालन के लिए धनराशि प्रदान करने का भी अनुरोध किया। डॉ. हर्षवर्धन ने मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और उन पर गौर करने का आश्वासन दिया।